top of page
OUR BLOGS


लक्ष्य
नेतराम भारती अगर-मगर की तोड़ दिवारें, चल उठ जो भी ठाना है। स्वेद-लहू की बूँद-बूँद का, फल तुझको मिल जाना है। व्योम-शिखर तक होड़ लगाते,...
Rachnakunj .
Sep 22, 20231 min read


गीत नहीं गाता हूँ।
अटल बिहारी वाजपेयी बेनक़ाब चेहरे हैं, दाग़ बड़े गहरे हैं टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूँ गीत नहीं गाता हूँ। लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा...
Rachnakunj .
Sep 19, 20231 min read


दुख
विपिन बंसल सुख में न जीना आया ! दुख ने सिखाया जीना !! दुख भला हो तेरा ! जो पत्थर बन गया हीरा !! सुख में न जीना आया ! दुख ने सिखाया जीना...
Rachnakunj .
Sep 17, 20231 min read


फूल पलाश के ले आना
सुनीता मुखर्जी "श्रुति" लौट आना फगुआ से पहले सँग फूल पलाश के ले आना बेरंग पल बीत रहे बन दुष्कर सुर्ख गुलाल बन बिखरा जाना। हर लम्हें गुजरे...
Rachnakunj .
Sep 16, 20231 min read


नयी कोपल
सविता पाटील कभी किसी में अपना ही अक्स दिख जाता है। जो तुम्हारे जैसा ही सोचता है। तुम्हारे जैसा ही किसी वृतांत को देखता है, समझता है। फिर...
Rachnakunj .
Sep 14, 20231 min read


ईश्वर के करम
डॉ. रश्मि दुबे भटकते हुए कारवां अक्सर दरबदर नहीं होते। सब के नसीब में खुदा रहने को घर नहीं होते। ग़ुरबत में जीते जो दुनिया से बेखबर नहीं...
Rachnakunj .
Sep 11, 20231 min read


एक परिंदे का खत, मेरे नाम।
डॉ. जहान सिंह ‘जहान’ तुम अपने को कहते हो ‘जहान’। अगर सुन सकते हो तो सुनो मेरा दर्द-ए-बयान। मुझे मेरे हिस्से का आसमां दे दो। कुछ हवा, चंद...
Rachnakunj .
Sep 10, 20231 min read


दूध में दरार पड़ गई
अटल बिहारी वाजपेयी ख़ून क्यों सफ़ेद हो गया? भेद में अभेद खो गया। बँट गये शहीद, गीत कट गए, कलेजे में कटार दड़ गई। दूध में दरार पड़ गई।...
Rachnakunj .
Sep 6, 20231 min read


आपके लिए
समीक्षा सिंह मंजिल तक जो जाती ना हों उन राहों पर जाना क्या। अनजाने लोगों को जग में अपना दर्द सुनाना क्या। चाहे कुछ भी मिल न सके पर कोई...
Rachnakunj .
Sep 5, 20231 min read


जग का मेला
सत्येंद्र तिवारी जग का मेला लगा रहेगा लगा रहेगा आना-जाना यही सत्य हमने पहचाना। ठगे गए सब इस मेले में, जाने कौन यहां ठगता है सब को ठगने...
Rachnakunj .
Sep 4, 20231 min read


आओ फिर से दिया जलाएँ
अटल बिहारी वाजपेयी आओ फिर से दिया जलाएँ भरी दुपहरी में अँधियारा सूरज परछाई से हारा अंतरतम का नेह निचोड़ें- बुझी हुई बाती सुलगाएँ। आओ फिर...
Rachnakunj .
Aug 29, 20231 min read


तृप्त हो जाती
अशोक कुमार बाजपेई बचपन में मां कहती थी मघा के बरसे मां के परसे धरती तृप्त हो जाती है और पुत्र की भूख भी। तब मां माघ नक्षत्र भादव मास में...
Rachnakunj .
Aug 26, 20231 min read


अज्ञानी
अमरेन्द्र मूर्ख भला कब कहता है, मैं हूँ एक अज्ञानी। उल्टा-सीधा करता है, यही है उसकी निशानी। केवल ग्रंथों को पढ़ने से, नहीं बनता कोई...
Rachnakunj .
Aug 23, 20231 min read


बेपनाह मुहब्बत
शिव सागर मौर्य धूल मैं तेरी गलियों की, कदमों से तेरे लिपट जाऊं। छूटे ना साथ कभी तेरा, मैं तेरे लिए ही मिट जाऊं।। हर पल राह निहार रही, आने...
Rachnakunj .
Aug 21, 20231 min read


कर्मों की दौलत
डॉ रश्मि दुबे कड़वे बोलों की बोली से जब जब दिल भर आता है। तीर ज़ुबां का जब भी लगता जख़्म नहीं भर पाता है। घटता रिश्तों का मीठा पन होते दिल...
Rachnakunj .
Aug 18, 20231 min read


अपना देश
दीपशिखा लैपटॉप लेकर बैठी है चुनमुनिया खलिहान में, दृश्य बदलते देख रही हूँ अपने हिंदुस्तान में... गूगल की दुनिया से जाने दुनिया का...
Rachnakunj .
Aug 17, 20231 min read


कुछ सवाल
मधु मधुमन रीत कैसी ये जग में चलाई गयी, नातवां पर ही उँगली उठाई गई, भूल बेटे भी करते हैं अक्सर तो फिर, क्यूँ बहू ही हमेशा सताई गयी। एक...
Rachnakunj .
Aug 16, 20231 min read


नीली चिड़िया
अंकिता शाम्भवी कई बार तुम्हें पढ़ते हुए मैं ख़यालों के समंदर में डूबने-उतराने लगती हूँ जब बिल्कुल डूबने को होती हूँ— तुम्हारी कविताएँ मुझे...
Rachnakunj .
Aug 15, 20232 min read


तिरंगा हम फहरायेंगे
पिंकी सिंघल झंडा ऊंचा रहे हमारा, लगता सबसे एकदम न्यारा, तीन रंगों से सजकर ये झंडा, दिखता देखो कितना प्यारा। हरा रंग हरियाली बतलाता, त्याग...
Rachnakunj .
Aug 14, 20231 min read


नमन मां शारदे
मुक्ता शर्मा पालते हैं जिद सभी बेकार की। बस यही तो है वजह तक़रार की जब से ऑंगन में लगी दीवार है। रौशनी आती नहीं उस पार की। बस अभी तो हम...
Rachnakunj .
Aug 12, 20231 min read
bottom of page