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लाख का शेर
प्रवीण कुमार फारस का राजा और बादशाह अकबर बहुत अच्छे दोस्त थे। वे दोनों एक दूसरे को पहेलियाँ व चुटकले भेजा करते थे। उन्हें एक दूसरे से...
प्रवीण कुमार
Jul 12, 20242 min read


रेशमा का घर
भगवती प्रसाद वर्मा मेरी शादी को लगभग 6 महीने हो चुके थे। अपनी पसंद की शादी करने के लिए मैंने बहुत पापड़ बेले थे। हमारे घर में यह पहली एक...
भगवती प्रसाद वर्मा
Jul 9, 20244 min read


लक्ष्य
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव बहुत मुश्किल से पापा ने आज मुझे आगे की पढ़ाई के लिए शहर भेजने की बात को मान लिया, अम्मा आज मैं बहुत खुश हूं...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jul 9, 20243 min read


आदर
रमा कांत द्विवेदी ट्रेन से उतर मैं और दादी ने गाँव की बस पकड़ी। बस भी गाँव के अंदर तक कहाँ जाती थी। सरकारी योजना के तहत बनी पक्की सड़क ने...
रमा कांत द्विवेदी
Jul 6, 20242 min read


निर्णय...
रमाकांत शुक्ला लड़की की मंगनी को सात महीने हो गए थे। मगर लड़के वालों को मनमुताबिक शुभ मुहूर्त नहीं मिल रहा था, सो शादी में देर हो रही थी।...
रमाकांत शुक्ला
Jul 3, 20242 min read


एक बेटा ऐसा भी
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव माँ, मुझे कुछ महीने के लिये विदेश जाना पड़ रहा है। तेरे रहने का इन्तजाम मैंने करा दिया है।" तक़रीबन 32 साल के, अविवाहित डॉक्टर सुदीप ने देर रात घर में घुसते ही कहा। "बेटा, तेरा विदेश जाना ज़रूरी है क्या?" माँ की आवाज़ में चिन्ता और घबराहट झलक रही थी। "माँ, मुझे इंग्लैंड जाकर कुछ रिसर्च करनी है। वैसे भी कुछ ही महीनों की तो बात है।" सुदीप ने कहा। "जैसी तेरी इच्छा।" मरी से आवाज़ में माँ बोली। और छोड़ आया सुदीप अपनी माँ 'प्रभा देवी' को पड़ोस वाले शहर में
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jul 3, 20243 min read


मर्द
मनोरंजन तिवारी आज हमेशा के मुकाबले ट्रेन में कम भीड़ थी। सुरेखा ने खाली जगह पर अपना ऑफिस बैग रखा और खुद बाजू में बैठ गई। पूरे डिब्बे में कुछ मर्दों के अलावा सिर्फ सुरेखा थी। रात का समय था सब उनींदे से सीट पर टेक लगाये शायद बतिया रहे थे या ऊँघ रहे थे। अचानक डिब्बे में 3-4 तृतीय पंथी तालिया बजाते हुए पहुँचे और मर्दों से 5-10 रूपये वसूलने लगे। कुछ ने चुपचाप दे दिए कुछ उनींदे से बड़बड़ाने लगे। "क्या मौसी रात को तो छोड़ दिया करो हफ्ता वसूली..." वे सुरेखा की तरफ रुख न करते हुए सी
मनोरंजन तिवारी
Jul 2, 20242 min read


आत्मनिर्भर
अल्पना सिंह भवानी रिटायर्ड हो कर घर आई, तो उसका मन बहुत भारी-भारी लग रहा था। 30 साल सर्विस किया भवानी ने, पति के मृत्यु के बाद। इस सर्विस...
अल्पना सिंह
Jul 2, 20243 min read


सासु माँ का सबक
लक्ष्मी कुमावत मीनल अभी तक बाजार से घर नहीं लौटी थी। शाम के 6:00 बजने को आ चुके थे। ममता जी बार-बार घर के बाहर आकर देख रही थी। सुबह...
लक्ष्मी कुमावत
Jul 1, 202410 min read


फिर एक बार…
रचना कंडवाल सुजाता ने आज दस साल बाद दोबारा "बसेरा" में कदम रखा था। ये वही "बसेरा" था जहां कभी वह दुल्हन बन कर आई थी। ये कभी उसका घर हुआ करता था। उसके ससुर रिटायर्ड जज अविनाश शर्मा की कोठी उसके पति आइपीएस निशांत शर्मा का घर। घर में शोक पसरा हुआ था, मृत शरीर को ले जाने की तैयारी थी। मरने वाली और कोई नहीं उसके पति की दूसरी पत्नी ज्योति थी। वो जाकर अपनी सास के पास खड़ी हो गई। मां आंखों में आंसू भरे उसे देखने लगी। उनकी गोद में ज्योति का बेटा आदित्य दुबका हुआ था। उम्र आठ साल थी। ऐ
रचना कंडवाल
Jul 1, 20248 min read


पते ठिकाने
निरंजन धुलेकर कुमार साहब के टेंशन के दो कारण थे, पहला पत्नी का अल्ट्रा मॉडर्न होना और दूसरा पत्नी द्वारा देर रात तक उनकी ओर पीठ मोड़ कर...
निरंजन धुलेकर
Jun 30, 20242 min read


सौदामिनी
विभा गुप्ता मेरी सहेली सौदामिनी देखने में जितनी सुन्दर थी, स्वभाव में उतनी ही कड़क। कई बार वो मेरी रूम पार्टनर भी बनी। जब कभी भी मैं उसे...
विभा गुप्ता
Jun 30, 20243 min read


अनहोनी...
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव गरीबी से जूझती सरला दिन-ब-दिन परेशान रहने लगी थी। भगवान के प्रति उसे असीम श्रद्धा थी और नित नेम करके ही वह दिन...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jun 26, 20242 min read


अच्छाई की जीत
विभा गुप्ता "अंशुल बेटे...पापा से पूछ...चाय बना दूँ।" "अंशुल...अपनी मम्मी को बोल दे...नहीं पीनी है चाय मुझे.....।" "अंशुल...पूछ अपने पापा...
विभा गुप्ता
Jun 26, 20242 min read


अधूरा सर्वे
अवधेश कुमार सिंह (टिंग-टॉन्ग.... दरवाजे पर घन्टी बजती है।). बहु देखना कौन है? सोफे पर लेटकर टीवी देख रहे ससुर ने कहा। माया किचन से निकलकर दरवाज़ा खोलती है। हां जी, आप कौन? 'महिलाओं की स्थिति पर एक सर्वे चल रहा है। उसी की जानकारी के लिए आई हूँ।' दरवाज़े पर खड़ी महिला ने जवाब दिया। कौन है बहु? पूछते हुए ससुरजी बाहर आ जाते हैं। महिला, 'बाऊजी सर्वे करने आई हूँ।' घनश्याम जी, 'हां पूछिए' महिला, 'आपकी बहु सर्विस करती हैं या हाउस वाइफ हैं?'
अवधेश कुमार सिंह
Jun 25, 20242 min read


मकान के पहरेदार
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव एक पुरानी सोसाइटी है। पूरे सैक्टर में हर गली में लोहे के गेट लगे हैं। जिनपर गार्ड रहते हैं, कुछ गार्ड तो हमारे टाईम से अब तक हैं। सोसाइटी में पहुंच कर गार्ड से बात कर रहा था कि और क्या हाल है आप लोगों का, तभी मोटरसाइकिल पर एक आदमी आया और उसने झुक कर प्रणाम किया। मैंने पहचानने की कोशिश की। बहुत पहचाना-पहचाना लग रहा था, पर नाम याद नहीं आ रहा था। उसी ने कहा, पहचाने नहीं? हम बाबू हैं, बाबू। उधर वाली आंटी के जी के घर काम करते थे। मैंने पहचान लिया।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Jun 25, 20243 min read


नगर वधू का उद्धार
शीतला प्रसाद द्विवेदी एक वैश्या थी। उसके मन में विचार आया कि मेरा कल्याण कैसे हो? अपने कल्याण के लिए वह साधुओं के पास गई, उन्होंने कहा कि...
शीतला प्रसाद द्विवेदी
Jun 20, 20243 min read


अमर सुहागन
जगदीश तोमर शा..लू शा...लू आवाज लगाती हुई मौसी बालकनी में आई बोली "अरे बेटा शालू! यहां बालकनी में क्या कर रही हो? शालू "मौसी, ये आंटी कौन...
जगदीश तोमर
Jun 20, 20242 min read


एक दिन की छुट्टी
निर्मला कुमारी शादी के बाद पहली बार ससुराल वो एक दिन की छुट्टी ले कर उससे मिलने आया था। आते वक़्त पहली बस छूट गई थी तो रात आठ के बदले सवा...
निर्मला कुमारी
Jun 18, 20242 min read
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