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सबसे प्रेम किया
नवीन रांगियाल मैं उन सीढ़ियों से भी प्रेम करता हूँ जिन पर चलकर उससे मिलने जाया करता था और उस खिड़की से भी जिसके बाहर देखती थीं उसकी उदास...
नवीन रांगियाल
Jul 16, 20241 min read


बहू की बंदिशे
संगीता शर्मा आशी आज बहुत गुस्से में थी, और होती भी क्यों ना? उसे लगता था, मोहल्ले की सभी बहुओं में सबसे ज्यादा दुखी वही है। शाम को जब...
संगीता शर्मा
Jul 16, 20243 min read


नया मकान
संतोष कुमार पटेल "भैया, परसों नये मकान पर हवन है। छुट्टी (इतवार) का दिन है। आप सभी को आना है, मैं गाड़ी भेज दूँगा।" छोटे भाई लक्ष्मण ने बड़े भाई भरत से मोबाईल पर बात करते हुए कहा। "क्या छोटे, किराये के किसी दूसरे मकान में शिफ्ट हो रहे हो?" "नहीं भैया, ये अपना मकान है, किराये का नहीं।" “अपना मकान”, भरपूर आश्चर्य के साथ भरत के मुँह से निकला। "छोटे तूने बताया भी नहीं कि तूने अपना मकान ले लिया है।" "बस भैया", कहते हुए लक्ष्मण ने फोन काट दिया। "अपना मकान", "बस भैया" ये शब्द भरत क
संतोष कुमार पटेल
Jul 15, 20243 min read


क्या ये ही जिंदगी है?
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव जीवन के 20 साल हवा की तरह उड़ गए। फिर शुरू हुई नौकरी की खोज। ये नहीं वो, दूर नहीं पास। ऐसा करते करते...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jul 15, 20243 min read


आत्मघाती कदम
श्याम आठले मैं ऑफिस के काम से मुंबई गया था। वैसे तो ऑफिस की तरफ से रुकने की व्यवस्था थी पर मित्र आकाश की ज़िद के आगे हार मानकर...
श्याम आठले
Jul 14, 20242 min read


मातृभाषा की मौत
जसिंता केरकेट्टा माँ के मुँह में ही मातृभाषा को क़ैद कर दिया गया और बच्चे उसकी रिहाई की माँग करते-करते बड़े हो गए। मातृभाषा ख़ुद नहीं मरी...
जसिंता केरकेट्टा
Jul 14, 20241 min read


संस्कारी बहू
वीरेन्द्र सिंह एक सेठ के सात बेटे थे। सभी का विवाह हो चुका था। छोटी बहू संस्कारी माता-पिता की बेटी थी। बचपन से ही अभिभावकों से अच्छे...
वीरेन्द्र सिंह
Jul 13, 20245 min read


एक मौका और ...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक बार मैं शहर से अपने गाँव जा रहा था। रास्ते में एक स्टेशन पर ट्रेन रुकी यहाँ उसका 15 मिनट का स्टॉपेज था, इसलिए...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jul 13, 20245 min read


आवरण
सुमन द्विवेदी धाड़… धाड़… धाड़… सविता का कलेजा तेज़ी से धड़कने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे वह बहुत दूर से दौड़ कर आ रही हो। ठंड के मौसम में भी उसके...
सुमन द्विवेदी
Jul 12, 202414 min read


लाख का शेर
प्रवीण कुमार फारस का राजा और बादशाह अकबर बहुत अच्छे दोस्त थे। वे दोनों एक दूसरे को पहेलियाँ व चुटकले भेजा करते थे। उन्हें एक दूसरे से...
प्रवीण कुमार
Jul 12, 20242 min read


रेशमा का घर
भगवती प्रसाद वर्मा मेरी शादी को लगभग 6 महीने हो चुके थे। अपनी पसंद की शादी करने के लिए मैंने बहुत पापड़ बेले थे। हमारे घर में यह पहली एक...
भगवती प्रसाद वर्मा
Jul 9, 20244 min read


लक्ष्य
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव बहुत मुश्किल से पापा ने आज मुझे आगे की पढ़ाई के लिए शहर भेजने की बात को मान लिया, अम्मा आज मैं बहुत खुश हूं...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jul 9, 20243 min read


आदर
रमा कांत द्विवेदी ट्रेन से उतर मैं और दादी ने गाँव की बस पकड़ी। बस भी गाँव के अंदर तक कहाँ जाती थी। सरकारी योजना के तहत बनी पक्की सड़क ने...
रमा कांत द्विवेदी
Jul 6, 20242 min read


निर्णय...
रमाकांत शुक्ला लड़की की मंगनी को सात महीने हो गए थे। मगर लड़के वालों को मनमुताबिक शुभ मुहूर्त नहीं मिल रहा था, सो शादी में देर हो रही थी।...
रमाकांत शुक्ला
Jul 3, 20242 min read


एक बेटा ऐसा भी
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव माँ, मुझे कुछ महीने के लिये विदेश जाना पड़ रहा है। तेरे रहने का इन्तजाम मैंने करा दिया है।" तक़रीबन 32 साल के, अविवाहित डॉक्टर सुदीप ने देर रात घर में घुसते ही कहा। "बेटा, तेरा विदेश जाना ज़रूरी है क्या?" माँ की आवाज़ में चिन्ता और घबराहट झलक रही थी। "माँ, मुझे इंग्लैंड जाकर कुछ रिसर्च करनी है। वैसे भी कुछ ही महीनों की तो बात है।" सुदीप ने कहा। "जैसी तेरी इच्छा।" मरी से आवाज़ में माँ बोली। और छोड़ आया सुदीप अपनी माँ 'प्रभा देवी' को पड़ोस वाले शहर में
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jul 3, 20243 min read


स्त्री की हत्या
अदनान कफ़ील दरवेश कुर्सियाँ उल्टी पड़ी हैं तंदूर बुझ चुका है आस-पास पानी गिरने से ज़मीन काफ़ी हँचाड़ हो गई है पत्तलों के ऊढे़ लगे हुए हैं...
अदनान कफ़ील दरवेश
Jul 3, 20242 min read


मर्द
मनोरंजन तिवारी आज हमेशा के मुकाबले ट्रेन में कम भीड़ थी। सुरेखा ने खाली जगह पर अपना ऑफिस बैग रखा और खुद बाजू में बैठ गई। पूरे डिब्बे में कुछ मर्दों के अलावा सिर्फ सुरेखा थी। रात का समय था सब उनींदे से सीट पर टेक लगाये शायद बतिया रहे थे या ऊँघ रहे थे। अचानक डिब्बे में 3-4 तृतीय पंथी तालिया बजाते हुए पहुँचे और मर्दों से 5-10 रूपये वसूलने लगे। कुछ ने चुपचाप दे दिए कुछ उनींदे से बड़बड़ाने लगे। "क्या मौसी रात को तो छोड़ दिया करो हफ्ता वसूली..." वे सुरेखा की तरफ रुख न करते हुए सी
मनोरंजन तिवारी
Jul 2, 20242 min read


आत्मनिर्भर
अल्पना सिंह भवानी रिटायर्ड हो कर घर आई, तो उसका मन बहुत भारी-भारी लग रहा था। 30 साल सर्विस किया भवानी ने, पति के मृत्यु के बाद। इस सर्विस...
अल्पना सिंह
Jul 2, 20243 min read


सासु माँ का सबक
लक्ष्मी कुमावत मीनल अभी तक बाजार से घर नहीं लौटी थी। शाम के 6:00 बजने को आ चुके थे। ममता जी बार-बार घर के बाहर आकर देख रही थी। सुबह...
लक्ष्मी कुमावत
Jul 1, 202410 min read


फिर एक बार…
रचना कंडवाल सुजाता ने आज दस साल बाद दोबारा "बसेरा" में कदम रखा था। ये वही "बसेरा" था जहां कभी वह दुल्हन बन कर आई थी। ये कभी उसका घर हुआ करता था। उसके ससुर रिटायर्ड जज अविनाश शर्मा की कोठी उसके पति आइपीएस निशांत शर्मा का घर। घर में शोक पसरा हुआ था, मृत शरीर को ले जाने की तैयारी थी। मरने वाली और कोई नहीं उसके पति की दूसरी पत्नी ज्योति थी। वो जाकर अपनी सास के पास खड़ी हो गई। मां आंखों में आंसू भरे उसे देखने लगी। उनकी गोद में ज्योति का बेटा आदित्य दुबका हुआ था। उम्र आठ साल थी। ऐ
रचना कंडवाल
Jul 1, 20248 min read


पते ठिकाने
निरंजन धुलेकर कुमार साहब के टेंशन के दो कारण थे, पहला पत्नी का अल्ट्रा मॉडर्न होना और दूसरा पत्नी द्वारा देर रात तक उनकी ओर पीठ मोड़ कर...
निरंजन धुलेकर
Jun 30, 20242 min read


सौदामिनी
विभा गुप्ता मेरी सहेली सौदामिनी देखने में जितनी सुन्दर थी, स्वभाव में उतनी ही कड़क। कई बार वो मेरी रूम पार्टनर भी बनी। जब कभी भी मैं उसे...
विभा गुप्ता
Jun 30, 20243 min read


अनहोनी...
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव गरीबी से जूझती सरला दिन-ब-दिन परेशान रहने लगी थी। भगवान के प्रति उसे असीम श्रद्धा थी और नित नेम करके ही वह दिन...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jun 26, 20242 min read
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