top of page
OUR BLOGS


पिता की दौलत
यह कहानी एक गहरी भावनात्मक और जीवन-मूल्य से भरी सामाजिक सच्चाई को उजागर करती है। कहानी की शुरुआत एक गांव में अकेले रह रहे बूढ़े पिता की मृत्यु से होती है। उनके दोनों बेटे, जो रोज़गार और भविष्य के लिए अलग-अलग शहरों में बस चुके थे, पिता के अंतिम संस्कार के लिए गांव आते हैं। सारे धार्मिक और सामाजिक कर्मकांड पूरे हो जाते हैं। गांव के कुछ लोग जा चुके होते हैं और कुछ अभी बैठे होते हैं, तभी बड़े भाई की पत्नी अपने पति के कान में कुछ फुसफुसाती है।
इसके बाद बड़े भाई अपने छोटे भाई को भी
श्रद्धा पटेल
Jan 23 min read


अरुण कुमार गुप्ता: एक भाई की कहानी
पिताजी के जाने के बाद, आज पहली बार हम दोनों भाईयों में जमकर बहस हुई। फोन पर मैंने उसे खूब खरी-खरी सुना दी। मैंने पुश्तैनी घर छोड़कर कुछ किलोमीटर दूर इस सोसायटी में रहने का फैसला किया। उन तंग गलियों में रहना मुझे और मेरे बच्चों को कतई नहीं भाता था। मेरी पत्नी और मैंने अच्छी खासी तनख्वाह के बूते एक बढ़िया फ्लैट ले लिया। सीधे-साधे से हमारे पिताजी ने कोई वसीयत तो की नहीं, पर उस पुश्तैनी घर पर मेरा भी तो बराबर का हक बनता है। मेरा छोटा भाई मना नहीं करता। वह लिखापढ़ी को भी राजी है
अरुण कुमार गुप्ता
Dec 4, 20253 min read
bottom of page