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दगाबाज़ तीतर
बाज़ार में कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया। मानो हर व्यक्ति अपने भीतर झाँकने लगा हो।
दोस्तों : दुश्मन से बचना आसान है, पर अपनों के भेष में छिपे विश्वासघातियों से नहीं। कभी-कभी सबसे बड़ा खतरा बाहर से नहीं, भीतर से आता है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
5 days ago2 min read
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