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पूस की रात
दोनों फिर खेत के डाँड़ पर आए। देखा, सारा खेत रौंदा पड़ा हुआ है और जबरा मड़ैया के नीचे चित लेटा है, मानो प्राण ही न हों।
दोनों खेत की दशा देख रहे थे। मुन्नी के मुख पर उदासी छायी थी, पर हल्कू प्रसन्न था।
मुन्नी ने चिंतित होकर कहा—अब मजूरी करके मालगुजारी भरनी पड़ेगी।
हल्कू ने प्रसन्न मुख से कहा—रात को ठंड में यहाँ सोना तो न पड़ेगा।
प्रेमचंद
Jun 58 min read


लोहे का तराजू
तब लोगों ने व्यापारी से पूरा मामला क्या है, बताने को कहा। व्यापारी ने लोगों को पूरा मामला बताया तो, व्यापारी की बात सुनकर बुजुर्गों ने साहूकार को तराजू वापस देने को कहा।
शिक्षा : जैसी करनी वैसी बरनी, जैसा बीज बोओगे, वैसी फसल काटोगे।
ललित कुमार
Mar 302 min read


चोर का दान
गरीब भावुक हो गया, "सेठ जी, आप बहुत अच्छे हैं।"
सेठ ने कहा, "न मैं अच्छा हूँ, न तुम। अच्छा तो वह चोर था, जिसने रुक्मणि की शादी की चिंता कर ली। काश, दुनिया में ऐसे भले चोर और होते!"
यह कहते हुए सेठ ने गरीब को गले से लगा लिया
मंजुला अवस्थी
Mar 73 min read
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