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जाने से पहले
सच्चा प्रेम केवल साथ रहने का नाम नहीं है। कभी-कभी प्रेम का सबसे बड़ा रूप यह होता है कि मनुष्य अपने न रहने की स्थिति में भी अपनों के लिए सुरक्षित भविष्य की व्यवस्था कर जाए। महेश अपने परिवार के साथ अधिक समय नहीं रह सका, लेकिन जाने से पहले वह इतना कर गया कि उसके बाद भी उसके अपने अकेले न रहें। और शायद प्रेम की सबसे सुंदर परिभाषा भी यही है— स्वयं चले जाना, लेकिन अपनों के लिए पीछे एक ऐसा सहारा छोड़ जाना जो उन्हें कभी बिखरने न दे।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 410 min read


प्रतीक्षा
उसकी मित्रता मेरे लिए अनोखी थी, मेरी आवश्यकता बन गई थी। आज तीन वर्ष के क़रीब हो गए… आज भी जब कभी फोन बजता है तो मैं "हाय प्रीति, क्या कर रही हो?" सुनने के लिए दौड़ पड़ती हूं। क्या फिर कभी वह फोन करेगा? पता नहीं वह ज़िंदा भी है या… पता नहीं, मन में ये अपशकुन क्यों आता है? मैं इंतज़ार करूंगी। कभी तो उसे मेरी याद आएगी… शायद यह कहानी पढ़कर, यदि किसी तरह यह उस तक पहुंच जाए, वह जान सकेगा कि मैं उसके फोन का कितनी बेसब्री से इंतज़ार कर रही हूं।
संगीता शर्मा
Sep 1510 min read


पिता की दौलत
यह कहानी एक गहरी भावनात्मक और जीवन-मूल्य से भरी सामाजिक सच्चाई को उजागर करती है। कहानी की शुरुआत एक गांव में अकेले रह रहे बूढ़े पिता की मृत्यु से होती है। उनके दोनों बेटे, जो रोज़गार और भविष्य के लिए अलग-अलग शहरों में बस चुके थे, पिता के अंतिम संस्कार के लिए गांव आते हैं। सारे धार्मिक और सामाजिक कर्मकांड पूरे हो जाते हैं। गांव के कुछ लोग जा चुके होते हैं और कुछ अभी बैठे होते हैं, तभी बड़े भाई की पत्नी अपने पति के कान में कुछ फुसफुसाती है।
इसके बाद बड़े भाई अपने छोटे भाई को भी
श्रद्धा पटेल
Jan 23 min read


कफ़न
प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “कफ़न” भारतीय ग्रामीण समाज की कठोर सच्चाइयों, गरीबी, संवेदनहीनता और सामाजिक व्यवस्था की विडंबना को उजागर करती है। कहानी के मुख्य पात्र घीसू और माधव हैं, जो बाप–बेटा हैं और अत्यंत निर्धन तथा कामचोर स्वभाव के हैं। वे समाज के हाशिए पर जीवन जीते हैं और मेहनत से दूर भागते हैं।
यह कहानी गरीबी से उपजे नैतिक पतन, सामाजिक अन्याय और मानवीय मूल्यों के क्षरण पर तीखा व्यंग्य करती है।
पूरी कहानी जानने के लिए पढ़ें : प्रेमचंद की लिखी कहानी कफ़न ?
प्रेमचंद
Jan 210 min read
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