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इशारा
आज पिंकी के माता-पिता को गए पन्द्रह दिन हो गए थे और अमित का घर एकदम सुचारू रूप से चल रहा था। उनके बूढ़े माँ-बाप बिल्कुल आराम से घर में रह रहे थे । सुबह शाम गृह सहायिका आ कर घर के कामों में हाथ बंटाती थी और पिंकी सास ससुर व पति का अच्छे से ख्याल रखती, क्योंकि वो अमित का दिया हुआ इशारा समझ गई थी कि यदि उसने फिर कोई गड़बड़ की तो....ठीक नहीं होगा।
शुभम गुप्ता
Sep 124 min read


पिता की दौलत
यह कहानी एक गहरी भावनात्मक और जीवन-मूल्य से भरी सामाजिक सच्चाई को उजागर करती है। कहानी की शुरुआत एक गांव में अकेले रह रहे बूढ़े पिता की मृत्यु से होती है। उनके दोनों बेटे, जो रोज़गार और भविष्य के लिए अलग-अलग शहरों में बस चुके थे, पिता के अंतिम संस्कार के लिए गांव आते हैं। सारे धार्मिक और सामाजिक कर्मकांड पूरे हो जाते हैं। गांव के कुछ लोग जा चुके होते हैं और कुछ अभी बैठे होते हैं, तभी बड़े भाई की पत्नी अपने पति के कान में कुछ फुसफुसाती है।
इसके बाद बड़े भाई अपने छोटे भाई को भी
श्रद्धा पटेल
Jan 23 min read
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