इशारा
शुभम गुप्ता
" माँ! आप क्यों बर्तन माँज रही हो?" अमित ने हैरानी से पूछा।
"वो...बेटा! काम वाली नहीं आई।"
"तो! आप पिंकी से कहती, खुद क्यों कर रही हो", बोलकर वो पिंकी को आवाज़ दे ही रहा था कि उसकी माँ ने उसे रोक दिया, ये कहकर कि बहु को परेशान मत कर, वो बीमार है।
अमित अपने कमरे में चला गया। यहाँ उसने देखा कि पिंकी हँस-हँसकर फोन पर बातें कर रही है।
"तुम तो फोन पर लगी हुई हो, उधर माँ बर्तन माँज रही हैं", अमित ने नाराजगी से कहा।
"अरे...वो, वो मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा था, मैंने माँ को मना भी किया कि आप काम मत करो, मैं ठीक हो जाऊँगी तो कर लूँगी, पर वो मानी ही नहीं।
खटक तो गया था अमित को कि कोई गड़बड़ है, मगर वो क्या करे, माँ से बात करने का कोई फायदा नहीं। उसे उनकी की आदत अच्छे से पता थी कि वो शिकायत नहीं करेंगी, चुपचाप काम करती रहेंगी बस।
रात के लगभग ग्यारह बजे जब वो माँ पिताजी के कमरे के बाहर से गुजर रहा था तो उन दोनों का धीमा वार्तालाप उसके कानों में पड़ा।
"कमला! मुझसे तुम्हारी ये हालत देखी नहीं जाती। इस उम्र में तुम्हें इतना काम करना पड़ रहा है। बर्तन माँजना, सफ़ाई करना, डस्टिंग करना..... मैंने अपने राज में कभी तुम्हें इतना नहीं खटाया।"
"तो क्या हुआ जी! शरीर चल रहा है तो कर रही हूँ, इसमें बुराई ही क्या है।"
"हाँ, और रात भर तुम्हारे घुटने दर्द से टीसते हैं, वो जैसे कुछ नहीं।"
"कोई न..." कमला जी ने लंबी साँस ली।
"मगर मुझे बहुत अपराधबोध होता है, काश! मेरा काम यूँ चौपट न हुआ होता तो बहु ये न कहती कि उसके पति पर खर्चों का बहुत बोझ है और वो काम वाली को नहीं हटाती, तब तुम्हारी ये हालत तो न होती। शर्मा जी बता रहे थे कि कॉलोनी में नाइट शिफ्ट में चौकीदारी करने के लिए आदमी चाहिए। मैं कल ही उस काम पर लग जाऊँगा।"
"आप पागल हो गए हो क्या! इस बुढ़ापे में जबकि आपको दमे की शिकायत है, आप रात भर जागकर चौकीदारी करोगे? मैं किसी हाल में आपको ये नहीं करने दूँगी। अरे! मैं घर के छोटे मोटे काम करने में घिस तो नहीं जाऊँगी? फिर ये हमारे ही बच्चे हैं, हमारा ही घर है, बेटा बहु खुश रहें और हमें क्या चाहिए?"
"तो मैं अमित से खुल कर बहु के बर्ताव के बारे में बात करूँगा", पिताजी आवेश में बोले।
"देखिए! आपको मेरी कसम है, जो अमित से बहू के बारे में एक शब्द भी कहा तो, आजकल का ज़माना नहीं देख रहे आप? जरा जरा सी बात पर लड़कियाँ घर छोड़कर चली जाती हैं और सीधे तलाक का नोटिस भेज देती हैं। पड़ोस में ही देख लो, ऐसा कांड हुआ है। मैं बिल्कुल नहीं चाहती हमारे बेटे का घर बिगड़े। अरे! इस शरीर का होना ही क्या है, मरने के बाद फूंकना ही तो है, तो अगर थोड़े हाथ पैर हिला लूंगी मेरा कुछ क्या बिगड़ जाएगा?"
उफ्फ! इतना सब चल रहा है घर में और मुझे भनक तक नहीं? मेरी बीवी ये सुलूक कर रही है मेरे माता पिता से? अमित को याद है कि उसकी ऊंची पढ़ाई के लिए उसके पिता ने सब जमा पूंजी खर्च कर दी थी…और अब उनका काम भी बंद हो गया था, तो इसका मतलब उनकी ये दुर्गति होगी?
रात भर अमित सोया नहीं। सुबह उसने पिंकी के मां बाप को फोन करके उन्हें अपने घर आने के लिए बोला और साथ ही ये भी कहा कि वो पिंकी को उनके आने का सरप्राइज़ देना चाहता है।
अगले दिन पिंकी के माता पिता वहाँ आ गए। उन्होंने देखा कि समधन जी घर के कामों में लगी हैं और उनकी बेटी अपने कमरे में टीवी देख रही है। उन्हें देखते ही पिंकी चौंक गई, उसने तुरंत सासू माँ के हाथों से काम लिया और सबके लिए चाय नाश्ता बनाया। फुर्सत हुई तो अपने माँ बाप से आने का कारण पूछने लगी।
पिंकी की माँ समझदार महिला थीं, वो दामाद की बातों से ही स्थिति भाँप गई थीं, इसलिए बेटी से बहाना बनाया कि हम तुम्हारे घर हफ़्ता भर रुकेंगे क्योंकि हमारे गुरुजी ने यहाँ भागवत सप्ताह का आयोजन किया है और उसके बाद शहर घूमेंगे। ये सुनकर पिंकी की हालत खराब हो गई, क्योंकि हफ्ते भर तो उससे काम होगा नहीं। उसे अपनी माँ की आदत भी अच्छे से पता थी, वो हमेशा उसे घर-गृहस्थी के काम सिखाना चाहती थीं और उसे उसके आलसी व्यवहार के कारण डांटती रहती थीं। यदि सासू जी को माँ ने काम करते देख लिया तो वो उसे ही डांटेगी।
सो उसने अगले दिन ही काम वाली को वापस आने को बोल दिया और रसोई का काम खुद संभालने लगी। उसके माता पिता दस दिन तक वहाँ रहे। उन्होंने अपने समधी समधन के साथ भागवत सप्ताह अटैंड किया और शहर भी घूमा।
आज पिंकी के माता-पिता को गए पन्द्रह दिन हो गए थे और अमित का घर एकदम सुचारू रूप से चल रहा था। उनके बूढ़े माँ-बाप बिल्कुल आराम से घर में रह रहे थे । सुबह शाम गृह सहायिका आ कर घर के कामों में हाथ बंटाती थी और पिंकी सास ससुर व पति का अच्छे से ख्याल रखती, क्योंकि वो अमित का दिया हुआ इशारा समझ गई थी कि यदि उसने फिर कोई गड़बड़ की तो....ठीक नहीं होगा।
******



Comments