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चोरी के गीत

  • Apr 17
  • 1 min read

रॉबिनहुड

 

जिसने चोरी के पढ़े, नब्बे प्रतिशत गीत।

उसने मंचों पर किया, जीवन अधिक व्यतीत।।

 

रचनाओं में झोंकता, जो ज़्यादातर जान।

मिल पाती उसको नहीं, यहाँ उचित पहचान।।

 

मौलिकता जिनमें भरी, जिनका शिल्प सचेत।

उनके हिस्से मंच के, आते बंजर खेत।।

 

कवि अभिनय करके पढ़े, फटे - पुराने छंद।

मंदबुद्धि श्रोता करें, उनको बहुत पसंद।।

 

या सच से वाकिफ नहीं, या बनता अंजान।

उसकी कविता देश को, पहुँचाती नुकसान।।

 

कविता की जादूगरी, उसको पूरी ज्ञात।

अभिनय उसका इसलिए, चलता सारी रात।।

 

जब कविता में घुस गए, नंगे धंधेबाज।

आदर कम रखने लगा, इसके लिए समाज।।

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