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ग़ज़ल
कुसुम शर्मा ये चाँदी की सी चमकीली हवाएं चली हैं आज बर्फ़ीली हवाएं बहे अश्क़ों के दरिया हैं कहीं पर नमी से हो रहीं गीली हवाएं असर ये...
Rachnakunj .
Jul 29, 20231 min read


कर्म ही अपने
रमेश चंद्र चंदेल सीता के रखवाले राम थे जब हरण हुआ तब कोई नहीं द्रोपदी के पांच पांडव थे जब चीर हरा तब कोई नहीं दशरथ के चार दुलारे थे जब...
Rachnakunj .
Jul 24, 20231 min read


मेरी कलम से…
ममता सिन्हा मैं उतरन उतराई थी! पीड़ित मन सकुचाई थी!! लड़की आने से नाखुश, कुपित हमारी माई थी!! पढ़ मत ज्यादा कहती थी! डाँट डपटती रहती थी!!...
Rachnakunj .
Jul 16, 20231 min read


बीते वक्त की बहार
डॉ. जहान सिंह “जहान” यूं तो चलन से बाहर हूं, पर बीते वक्त की बहार हूं, यह सोचना गलत है कि मैं बेकार हूं आज भी पहली कतार में बैठा हुआ,...
Rachnakunj .
Jul 9, 20231 min read


बरगद का पेड़
अनजान मैं उस हरकारे के बच्चों को भी उसी समय से देख रहा था जिस समय से मैं उस बरगद के पेड़ को देखा करता था पेड़ के आसपास और भी लत्तरें थींl...
Rachnakunj .
Jul 4, 20232 min read


आत्महत्या
पूनम जो छोड़कर जा रहा हो, उसे खुशी से जाने दो, रोकना ना कभी, हो सकता है ऊपर वाले ने, तुम्हारे लिए, कुछ और बेहतर सोच रखा हो। आदतें जो लगी...
Rachnakunj .
Jun 24, 20231 min read


मेरी कोई जायदाद नहीं
अनजान तन्हा बैठा था एक दिन मैं अपने मकान में, चिड़िया बना रही थी घोंसला रोशनदान में। पल भर में आती पल भर में जाती थी वो। छोटे-छोटे तिनके...
Rachnakunj .
Jun 20, 20231 min read


मन बच्चा
वीना उदय मन फिर-फिर बच्चा हो जाता है। जब 80 साल की बुजुर्ग पिता को अपनी चिंता करता पाता है। बूढ़ी सशक्त हड्डियां सारी ताकत समेट जब पूरे...
Rachnakunj .
Jun 19, 20231 min read


आतप प्रताप
वीना उदय दिनकर के आतप से आकुल अवनि का आँचल है तृषित है जन-जन, व्याकुल तन-मन ठाँव ढूँढते वन-वन। लुप्त हुई मानो हरियाली, सूखी पत्ती-पत्ती औ...
Rachnakunj .
Jun 17, 20231 min read


दिल की सुन
सुमन मोहिनी वो वफ़ा करें या जफ़ा करें सब क़बूल सजदे में उनके हमने सर को झुकाया है। इस दिल की बेक़रारी क्या समझेगा वो जिसके लिए होशो हवास...
Rachnakunj .
Jun 15, 20231 min read


मेरे हमनशीं
संपदा ठाकुर गुज़रे लम्हें याद करे या तुझ को याद करे, ऐ ज़िंदगी तूही बता दे कैसे तुझे शाद करे। तू नसीब बनकर मेरा सर पर चमकता रहे, तु मेरा...
Rachnakunj .
Jun 12, 20231 min read


खामोशी दे दी..
नीलम गुप्ता जो लोग मेरे बोलने से बहुत परेशान थे मैने उनको तोहफ़े में ख़ामोशी दे दी किसी बात पर अपनी राय नहीं देती मैने चुप्पी अब अधरों पे...
Rachnakunj .
Jun 6, 20231 min read


स्त्री
वंदना सक्सेना स्त्री केवल तन ही नहीं मन भी है पाकीज़गी है निर्मलता है जो समा लेती है सैकड़ों यातनाएं मन के अंदर जो तू देता है कभी सोचा वो...
Rachnakunj .
May 28, 20231 min read


सेवानिवृत्त जिंदगी
अनजान रिटायर्ड आदमी को, सब फालतू समझते हैं। वे छोटी-छोटी बातों में, बार-बार बमकते हैं। बात करो तो, अपनी ही हाँकते हैं। मैंने ये किया, वो...
Rachnakunj .
May 19, 20232 min read


मां
आचार्य जहान कभी ऐसा भी हो जाए। मां का अपना घर एक दिन को उसका मायका हो जाए। वो भी रूठे, खेल-कूदे, और नाचे-गाये। उसको भी कोई बच्चों सा...
Rachnakunj .
May 14, 20231 min read


यादें
ओम प्रकाश तिवारी बात-बात में बात हो गई। पार उमरिया साठ हो गई।। अम्मा ने जो की बतकहियाँ। आज वही ज़ज्बात हो गई।। पिता तुम्हारे संघर्षों की।...
Rachnakunj .
Apr 24, 20231 min read


तुम हो किंचित निकट यहीं
तुम हो किंचित निकट यहीं महेन्द्र मुकुंन्द पिय! तुम हो किंचित निकट यहीं.......... ऐसा होता आभास मुझे। मृदु-गंध-पवन तन छू मेरा, देकर जाती...
Rachnakunj .
Apr 20, 20231 min read


WE & THEY
Avighna Gautam Life to humans, Is a beautiful destiny As for animals, We all are enemy. They live in the world Of torture, sadness and...
Rachnakunj .
Apr 11, 20231 min read


मौन अखरता है।
आलोकेश्वर चबडाल अखरता है शब्दकोश के शब्दों के यह, कान कतरता है, मौन अखरता है प्रिय तेरा, मौन अखरता है! निर्मम निर्दय निष्ठुर नीरस जो चाहे...
Rachnakunj .
Apr 9, 20231 min read


घर की याद
भवानीप्रसाद मिश्र आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, रात-भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है, अब सवेरा हो गया है, कब सवेरा हो...
Rachnakunj .
Apr 8, 20234 min read
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