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मुस्कान के उस पार
पटना के पुराने मोहल्लों की अपनी एक अलग दुनिया है। वहाँ घर केवल ईंट और पत्थरों से नहीं बने होते, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ी स्मृतियों, रिश्तों और अनकही कहानियों से भी बने होते हैं। संकरी गलियाँ, एक-दूसरे से सटी दीवारें और कुछ ही फुट की दूरी पर बनी छतें—जहाँ पड़ोसियों की बातचीत के साथ कभी-कभी दिलों की धड़कनें भी एक-दूसरे तक पहुँच जाती हैं।
दीपा शर्मा
16 hours ago12 min read


संतों के प्रति आदर-भाव
दत्त-परिवार के लोग एक गाड़ी में घूमने बाहर निकले हैं। माँ की गोद में बैठे हुए नरेंद्रनाथ कई विषयों पर कितने ही प्रश्न करते चलते हैं, उनकी उत्सुकता की सीमा नहीं रहती। इसी बीच पिता ने उनसे पूछा, "विले, बड़े होने पर तुम क्या बनोगे, कहो तो?" नरेंद्र को सोचने की जरूरत नहीं थी, झट से उत्तर दिया, "सईस वा कोचवान।"
मुकेश ‘नादान’
Mar 272 min read
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