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ज़रीन खान: चकाचौंध से परे एक जीवन

13 hours ago
4 min read

सुजाता सिंह

किसी व्यक्ति के चले जाने के बाद उसकी पहचान केवल उसके काम या प्रसिद्धि से नहीं होती। वह उन स्मृतियों में भी जीवित रहता है जो उसने अपने आसपास के लोगों के जीवन में छोड़ी होती हैं। किसी को उसकी हँसी याद आती है, किसी को उसके हाथों का स्वाद, तो किसी को कठिन समय में मिला उसका स्नेह।

ज़रीन खान का जीवन भी अनेक ऐसी स्मृतियों से जुड़ा रहा। सिनेमा की चमकदार दुनिया से उनका परिचय था, लेकिन उनकी रुचियाँ अभिनय तक सीमित नहीं थीं। परिवार, घर की साज-सज्जा, पाककला और रचनात्मक कार्यों में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

उनके निधन की खबर ने परिवार और फिल्म जगत से जुड़े लोगों को शोक में डुबो दिया। उनके जीवन को याद करने का अर्थ केवल एक अभिनेत्री के सफर को देखना नहीं, बल्कि उन अनेक भूमिकाओं को समझना भी है जिन्हें उन्होंने समय के साथ अपनाया।

ज़रीन खान ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग और अभिनय से की। हिंदी सिनेमा में उनकी उपस्थिति अपेक्षाकृत संक्षिप्त रही, लेकिन उन्होंने तेरे घर के सामने (1963) और एक फूल दो माली (1969) जैसी फिल्मों में काम किया। आगे चलकर उन्होंने अभिनय से अलग अपनी रचनात्मक रुचियों को नया विस्तार दिया।

उनकी कहानी का यह पक्ष विशेष ध्यान खींचता है कि उन्होंने अपनी पहचान को किसी एक पेशे तक सीमित नहीं रखा। पर्दे पर काम करने के बाद घरों की साज-सज्जा और इंटीरियर डिजाइनिंग की दुनिया में उन्होंने अपनी जगह बनाई। किसी रचनात्मक व्यक्ति के लिए माध्यम बदल सकता है, लेकिन सृजन की इच्छा बनी रह सकती है। ज़रीन के जीवन में अभिनय से डिजाइनिंग की ओर बढ़ना इसी परिवर्तन का उदाहरण था।

ज़रीन और अभिनेता संजय खान की मुलाकात के बारे में प्रचलित विवरणों के अनुसार, उनकी पहली भेंट एक बस स्टॉप पर हुई थी। वह आकस्मिक परिचय आगे चलकर एक लंबे संबंध में बदल गया। वर्ष 1966 में दोनों ने विवाह किया।

विवाह के बाद उनके जीवन में परिवार की जिम्मेदारियाँ बढ़ीं। उनके चार बच्चे हुए—सिमोन अरोड़ा, फराह अली खान, सुज़ैन खान और ज़ायेद खान। बच्चों के पालन-पोषण और पारिवारिक जीवन के साथ ज़रीन ने अपनी रचनात्मक रुचियों को भी जीवित रखा। इंटीरियर डिजाइनिंग में उनकी रुचि और काम का प्रभाव अगली पीढ़ी तक पहुँचा। उनकी बेटी सुज़ैन ने भी इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाया।

ज़रीन के जीवन को केवल किसी प्रसिद्ध अभिनेता की पत्नी या प्रसिद्ध बच्चों की माँ के परिचय में समेट देना उनके अपने काम और रुचियों के साथ न्याय नहीं होगा। उनका व्यक्तित्व उन सभी भूमिकाओं से मिलकर बना था जिन्हें उन्होंने जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर निभाया।

समय के साथ परिवार में भी परिवर्तन आए। सुज़ैन खान और अभिनेता ऋतिक रोशन का वैवाहिक संबंध समाप्त हो गया, लेकिन दोनों परिवारों के बीच संपर्क और आत्मीयता बनी रही। सितंबर 2026 में प्रकाशित एक साक्षात्कार के अनुसार, सुज़ैन ने बताया कि माँ के निधन के बाद ऋतिक की माँ पिंकी रोशन के साथ उनका संबंध और गहरा हुआ।

रिश्तों का यह पक्ष एक महत्त्वपूर्ण बात की ओर ध्यान दिलाता है—परिवार के संबंध हमेशा एक ही रूप में नहीं रहते। परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन परस्पर सम्मान और संवेदनशीलता के लिए स्थान बना रह सकता है। ज़रीन के परिवार की कहानी में भी संबंधों का यह विस्तार दिखाई देता है।

7 नवंबर 2025 को मुंबई स्थित अपने आवास पर ज़रीन खान का 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। समाचार रिपोर्टों में उनके निधन के संदर्भ में उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं तथा कार्डियक अरेस्ट का उल्लेख मिलता है। उनकी अंतिम विदाई में परिवार के सदस्यों के साथ फिल्म जगत की अनेक हस्तियाँ उपस्थित हुईं। ऋतिक रोशन, सबा आज़ाद, जैकी श्रॉफ और बॉबी देओल सहित कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

ज़रीन का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया। उनके पुत्र ज़ायेद खान ने अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं। बाद में ज़ायेद ने स्पष्ट किया कि उनकी माँ की इच्छा थी कि उनकी अस्थियाँ नदी में विसर्जित की जाएँ। इस प्रसंग का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू किसी धार्मिक पहचान को लेकर अनुमान लगाना नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की अंतिम इच्छा के प्रति उसके परिवार का सम्मान है।

जीवन भर मनुष्य अपने विचारों, आस्थाओं और अनुभवों के साथ अपनी अलग पहचान बनाता है। उसकी विदाई के समय उस पहचान और इच्छा का आदर करना भी स्नेह की एक अभिव्यक्ति हो सकता है।

माँ के जाने के बाद बच्चों के लिए घर का अर्थ भी बदल जाता है। वही कमरे, वही तस्वीरें और वही परिचित वस्तुएँ अचानक किसी की अनुपस्थिति का एहसास कराने लगती हैं। रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातें याद आती हैं—किसी का हाल पूछना, भोजन के लिए बुलाना या बिना कुछ कहे मन की परेशानी समझ लेना।

ज़रीन के निधन के बाद सुज़ैन खान और फराह अली खान ने अपनी माँ को भावपूर्ण संदेशों के माध्यम से याद किया। सुज़ैन ने अपने व्यक्तित्व और जीवन पर माँ के गहरे प्रभाव को स्वीकार किया।

उनकी श्रद्धांजलि यह याद दिलाती है कि माता-पिता की विरासत केवल संपत्ति या उपलब्धियों में नहीं होती। वह बच्चों के विचारों, व्यवहार और जीवन को देखने के दृष्टिकोण में भी बनी रहती है। ज़रीन खान की स्मृतियाँ उनके परिवार के लिए निजी और अनमोल हैं। बाहरी दुनिया उनके अभिनय, डिजाइनिंग और सार्वजनिक जीवन को याद कर सकती है, लेकिन परिवार के लिए वह उन अनगिनत क्षणों का हिस्सा थीं जिन्हें किसी फिल्म, तस्वीर या समाचार में पूरी तरह समेटा नहीं जा सकता।

ज़रीन खान ने जीवन के विभिन्न पड़ावों पर अलग-अलग भूमिकाएँ निभाईं। कभी वह कैमरे के सामने थीं, कभी घरों को सुंदर बनाने के रचनात्मक कार्य में व्यस्त थीं और कभी परिवार के साथ जीवन के सुख-दुख साझा कर रही थीं। उनकी जीवनयात्रा हमें किसी एक भूमिका को दूसरी से बड़ा या छोटा मानने के बजाय यह समझने का अवसर देती है कि मनुष्य की पहचान अनेक अनुभवों से मिलकर बनती है।

प्रसिद्धि समय के साथ बदल सकती है। पेशे बदल सकते हैं। जीवन की परिस्थितियाँ भी हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। लेकिन किसी व्यक्ति ने दूसरों के जीवन को किस प्रकार छुआ, यह बात उसके जाने के बाद भी स्मृतियों में बनी रह सकती है। ज़रीन खान अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका रचनात्मक कार्य, परिवार के साथ उनका जीवन और उनसे जुड़ी स्मृतियाँ उनके जीवन की कहानी को आगे बढ़ाती रहेंगी। क्योंकि किसी जीवन की पूरी कहानी उसके अंतिम दिन पर समाप्त नहीं होती; उसका एक हिस्सा उन लोगों के हृदय में आगे भी लिखा जाता रहता है, जिन्होंने उसे प्रेम किया था।

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