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महकते अल्फाज

14 hours ago
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हेमलता संगुरी

 

महकते से अल्फाज मेरे

तेरे एहसास से होके गुजरे हैं

ऐसा लगा जैसे सांस मेरे

तेरे सांस से होके गुजरे हैं

पढ़ना जरा मोहब्बत से तुम

मेरी मोहब्बत का अफसाना

लिखे इक इक लफ्ज़ मेरे

जज़्बात से होके गुजरे हैं

महकते से अल्फाज मेरे

तेरे एहसास से होके गुजरे हैं

 

तेरे रंग में अब तो मेरी

ढल जाती हैं शायरी

लिखता हूं मैं खुदको तुझमें

बदल जाती हैं शायरी

इश्क टपकता है जैसे तेरी

बरसात से होके गुजरे हैं

महकते से अल्फाज मेरे

तेरे एहसास से होके गुजरे हैं

 

मेरी सुबह मेरी शामों पर

तेरी यादों का पहरा है

नही मानता जिद्दी दिल

बस तेरे नाम पे ठहरा है

अब तो इन आंखो को कोई

और दिखाई देता ही नही

जहाँ मिले शुकून हमें वो

बस तेरा ही चेहरा है

खुशबू आए मोहब्बत की जैसे

तेरे पास से होके गुजरे हैं

महकते से अल्फाज मेरे

तेरे एहसास से होके गुजरे हैं

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