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सौदामिनी
विभा गुप्ता मेरी सहेली सौदामिनी देखने में जितनी सुन्दर थी, स्वभाव में उतनी ही कड़क। कई बार वो मेरी रूम पार्टनर भी बनी। जब कभी भी मैं उसे...
विभा गुप्ता
Jun 30, 20243 min read


अनहोनी...
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव गरीबी से जूझती सरला दिन-ब-दिन परेशान रहने लगी थी। भगवान के प्रति उसे असीम श्रद्धा थी और नित नेम करके ही वह दिन...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jun 26, 20242 min read


अच्छाई की जीत
विभा गुप्ता "अंशुल बेटे...पापा से पूछ...चाय बना दूँ।" "अंशुल...अपनी मम्मी को बोल दे...नहीं पीनी है चाय मुझे.....।" "अंशुल...पूछ अपने पापा...
विभा गुप्ता
Jun 26, 20242 min read


अधूरा सर्वे
अवधेश कुमार सिंह (टिंग-टॉन्ग.... दरवाजे पर घन्टी बजती है।). बहु देखना कौन है? सोफे पर लेटकर टीवी देख रहे ससुर ने कहा। माया किचन से निकलकर दरवाज़ा खोलती है। हां जी, आप कौन? 'महिलाओं की स्थिति पर एक सर्वे चल रहा है। उसी की जानकारी के लिए आई हूँ।' दरवाज़े पर खड़ी महिला ने जवाब दिया। कौन है बहु? पूछते हुए ससुरजी बाहर आ जाते हैं। महिला, 'बाऊजी सर्वे करने आई हूँ।' घनश्याम जी, 'हां पूछिए' महिला, 'आपकी बहु सर्विस करती हैं या हाउस वाइफ हैं?'
अवधेश कुमार सिंह
Jun 25, 20242 min read


मकान के पहरेदार
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव एक पुरानी सोसाइटी है। पूरे सैक्टर में हर गली में लोहे के गेट लगे हैं। जिनपर गार्ड रहते हैं, कुछ गार्ड तो हमारे टाईम से अब तक हैं। सोसाइटी में पहुंच कर गार्ड से बात कर रहा था कि और क्या हाल है आप लोगों का, तभी मोटरसाइकिल पर एक आदमी आया और उसने झुक कर प्रणाम किया। मैंने पहचानने की कोशिश की। बहुत पहचाना-पहचाना लग रहा था, पर नाम याद नहीं आ रहा था। उसी ने कहा, पहचाने नहीं? हम बाबू हैं, बाबू। उधर वाली आंटी के जी के घर काम करते थे। मैंने पहचान लिया।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Jun 25, 20243 min read


नगर वधू का उद्धार
शीतला प्रसाद द्विवेदी एक वैश्या थी। उसके मन में विचार आया कि मेरा कल्याण कैसे हो? अपने कल्याण के लिए वह साधुओं के पास गई, उन्होंने कहा कि...
शीतला प्रसाद द्विवेदी
Jun 20, 20243 min read


अमर सुहागन
जगदीश तोमर शा..लू शा...लू आवाज लगाती हुई मौसी बालकनी में आई बोली "अरे बेटा शालू! यहां बालकनी में क्या कर रही हो? शालू "मौसी, ये आंटी कौन...
जगदीश तोमर
Jun 20, 20242 min read


एक दिन की छुट्टी
निर्मला कुमारी शादी के बाद पहली बार ससुराल वो एक दिन की छुट्टी ले कर उससे मिलने आया था। आते वक़्त पहली बस छूट गई थी तो रात आठ के बदले सवा...
निर्मला कुमारी
Jun 18, 20242 min read


दीवाना
दिनेश दुबे अभिषेक एक सुंदर नौजवान लड़का है। आज ऑफिस आते समय लॉबी में उसे एक सुंदर लड़की दिखाई देती है। वह देखते ही उसका दीवाना हो जाता...
दिनेश दुबे
Jun 18, 20246 min read


कुदरत का चमत्कार
हरभजन सिंह विभाजन के पहले भारत और आज के पाकिस्तान में नदी किनारे बसा एक गाँव था ‘बसाल’। मेरी दादी उसी गाँव की थीं। गाँव में रहता था एक...
हरभजन सिंह
Jun 16, 20248 min read


निवेश
दर्शना जैन बैंक के लंच टाइम में अमर, रमन और नवल खाना खाते हुए एक दूसरे को बता रहे थे कि वे अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने हेतु क्या...
दर्शना जैन
Jun 16, 20241 min read


फुल्ला जीजी
मंजू यादव 'किरण' फूलवती जी क्लब में होने वाले सत्संग से जब शाम को घर लौटी तो उनकी बड़ी बेटी रूचि ने मामा के लड़के की शादी का कार्ड दिया...
मंजू यादव 'किरण'
Jun 15, 20243 min read


पछतावा
नरेंद्र कुमार रितिक एक बहुत समझदार और सुलझे विचारों की लड़की थी। सभी लोगों उसे बेहद पसंद करते थे। कुछ समय के पश्चात उसका विवाह हो गया। कई...
नरेंद्र कुमार
Jun 15, 20242 min read


एक पेड़ हमने लगाया
अशोक कुमार बाजपेई अब गति आगे बढ़ाओ एक पेड़ हमने लगाया एक तुम लगाओ पंक्ती को बनाओ पांति को सजाओ एक पेड़ हमने लगाया एक तुम लगाओ यहां से...
अशोक कुमार बाजपाई
Jun 15, 20241 min read


बाँझ
शीतला प्रसाद आधी रात का समय था रोज की तरह एक बुजुर्ग शराब के नशे में अपने घर की तरफ जाने वाली गली से झूमता हुआ जा रहा था, रास्ते में एक...
शीतला प्रसाद
May 19, 20242 min read


शहर खर्चीले होते हैं।
लक्ष्मी कुमावत “ये क्या छोटी बहू? ये मैं क्या सुन रही हूं? तुमने दिनेश की पढ़ाई शहर में अपने घर पर रखकर करवाने से इनकार कर दिया। भला ये...
लक्ष्मी कुमावत
May 19, 20247 min read


जंगल का राजा
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक बार की बात है कि जंगल के राजा सिंह को भूख लगी और उसने लोमड़ी से कहा, मेरे लिए कोई शिकार ढूंढकर लाओ, अन्यथा...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
May 17, 20242 min read


आ गले लग जा….
रवीन्द्र कान्त त्यागी “सुनो माला, यार कल तुमने खाने में मिर्ची बहुत डाल रखी थीं। मिर्ची ज्यादा हो तो सुबह को टॉयलेट में भी झेलना पड़ता है...
रवीन्द्र कान्त त्यागी
May 17, 202414 min read


जीवन का सार
हनुमान प्रसाद बाजपेई एक बार एक व्यापारी था, जो एक छोटे से गाँव में समुद्र तट के किनारे बैठा था। उसने देखा कि एक मछुआरा एक छोटी नाव को...
हनुमान प्रसाद बाजपेई
May 16, 20242 min read


खुशियों का सौदा
विनय कुमार मिश्रा इस बड़े शहर में एक छोटा सा कॉस्मेटिक शॉप है मेरा। पति ने खोला था मेरे नाम पर। झुमकी श्रृंगार स्टोर। आज एक नया जोड़ा आया...
विनय कुमार मिश्रा
May 16, 20242 min read
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