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दिव्य कमल
हरिशंकर गोयल "श्री हरि" गन्धमादन पर्वत पर सम्राट युधिष्ठिर, भीम, नकुल, सहदेव, द्रोपदी, ऋषि धौम्य, महर्षि लोमश और अन्य साधु संत "नर...
हरिशंकर गोयल "श्री हरि"
Nov 4, 20248 min read


निषिद्ध भोजन
मुकेश ‘नादान’ एक दिन नरेंद्र होटल में खाना खा आया और आकर श्रीरामकृष्ण देव से कहा, “महाराज, आज एक होटल में, साधारण लोग जिसे निषिद्ध कहते...
मुकेश ‘नादान’
Nov 3, 20243 min read


1 रू के बदले 100 रू
रूपाली सिंह एक फोटो कापी की दुकान पर एक लड़का उम्र लगभग 22, एक लड़की लगभग 19 साल की, एक लड़का लगभग 35 वर्ष का दाखिल हुए। काफी जल्दबाजी...
रूपाली सिंह
Oct 31, 20243 min read


माँ काली की उपासना
मुकेश ‘नादान’ कहते हैं कि जब बुरा समय आता है तो चारों ओर से घेर लेता है। दुर्दिनों में संयमी से संयमी व्यक्ति भी अपना संयम खो देता है,...
मुकेश ‘नादान’
Oct 29, 20242 min read


बेशकीमती दौलत
रमाकांत द्विवेदी अजी सुनते हो, आज एक बात पूछू आपसे। एक 80 वर्ष की बुजुर्ग पत्नी ने अपने 84 वर्षीय पति से कहा। बुजुर्ग पति छडी का सहारा लिए अपनी बुजुर्ग पत्नी के करीब आए और बोले, कहो। बुजुर्ग पत्नी भावुक होकर बोली,“आपको याद है आपने हमारी शादी से पहले अपनी माताजी को छुपकर एक खत लिखा था जिसमे आपने अपने गुस्से को व्यक्त करते हुए लिखा था कि आप मुझसे शादी नहीं करना चाहते, क्योंकि आपको मेरा चेहरा पसंद नहीं था।” बुजुर्ग पति ने हैरान होकर पूछा,“वो खत, वो तुम्हें कहां मिला? वो तो ब
रमाकांत द्विवेदी
Oct 28, 20242 min read


खोमचे वाला
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक आदमी था, जो कॉन्वेंट स्कूल में पीरियड और छुट्टी की घंटा बजाता था। टन..टन..टन..टन..टन..। एक दिन स्कूल के नए...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 26, 20241 min read


सारा की छड़ी
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक लड़का अपने बूढ़े दादा के पास गया और पूछा, "दादाजी, क्या आप मुझे कोई नैतिक शिक्षा वाली कहानी सुना सकते हैं?"...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 25, 20242 min read


स्वप्न
मुकेश ‘नादान’ नरेंद्र अकसर कलकत्ता में अपने घर में बैठकर सुदूर दक्षिणेश्वर में श्रीरामकृष्ण के ध्यान में निमग्न श्रीमूर्ति का दर्शन किया...
मुकेश ‘नादान’
Oct 24, 20242 min read


लोहार
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक बढ़ई किसी गांव में काम करने गया, लेकिन वह अपना हथौड़ा साथ ले जाना भूल गया। उसने गांव के लोहार के पास जाकर...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 23, 20242 min read


आजादी
प्रेम साधना मैं तुम्हारी माँ के बंधन में और नहीं रह सकती, मुझे अलग घर चाहिए, जहाँ मैं खुल के साँस ले सकूँ। पलक रवि को देखते ही ज़ोर से...
प्रेम साधना
Oct 22, 20243 min read


मेरी माँ
आकाश बाजपेयी मेरा नाम सुमन है। मेरी शादी एक बड़े घर में हुई है। मेरे पति विनीत की फैमिली का अच्छा बिज़नेस है। विनीत एकलौते बेटे हैं।...
आकाश बाजपेयी
Oct 17, 20244 min read


असली मानवता
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव अमेरिका के एक रेस्तरां में वेट्रेस ने एक आदमी और उसकी पत्नी को लंच का मेनू दिया और मेनू देखने से पहले, उन्होंने...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 17, 20243 min read


सज़ा
निरंजन धुलेकर अब बेटे के पास ढेरों ऐसे काम थे जिनका संबंध घर से तो बिल्कुल भी नही था। पढ़ाई के अलावा बहुत सारी बातें उसके लिए बेहद ज़रूरी...
निरंजन धुलेकर
Oct 16, 20242 min read


दूरी
सुनील त्रिपाठी यूं तो वह दोनों बहनें हैं और खुशकिस्मती से दोनों सगे भाइयों से ब्याही गई थी। मगर शादी के बाद घर में दोनों देवरानी-जेठानी...
सुनील त्रिपाठी
Oct 16, 20242 min read


सफल जन्म
स्नेहा सिंह "दादी मां, हर किसी के जन्म के पीछे विधाता कोई न कोई ध्येय निश्चित किए रहता है? क्या यह बात सच है?" किशोर वया विधि अपनी दादी मीना की गोद में सिर रखे हुए आकाश में तारों को देखते हुए बोली। "हां, बेटा हर आदमी के जन्म के पीछे विधाता का एक निश्चित ध्येय होता है पर अपने जन्म का ध्येय बहुत कम लोग ही पूरा करने में सफल हो पाते हैं।" विधि के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए मीना ने कहा। "ऐसा क्यों दादी मां? हर किसी का ध्येय क्यों नहीं पूरा होता? मम्मी-पापा का तो पूरा हुआ है
स्नेहा सिंह
Oct 13, 20245 min read


निश्चिन्ती
विकास यादव इनकी शुरू से एक आदत है। सोते समय या तो मेरा हाथ पकड़ लेंगे या मेरे गाल पर हाथ रख कर सोएंगे, कुछ नही तो साड़ी का पल्लू ही हाथ मे...
विकास यादव
Sep 30, 20242 min read


मुक्ति
रंजना मिश्रा सुबह लगभग चार बजे का समय था। कड़ाके की ठंड के बावज़ूद वे रोज की तरह प्रातः भ्रमण के लिए निकले थे। सुनसान सडक के किनारे-किनारे...
रंजना मिश्रा
Sep 30, 20242 min read


बूट पॉलिश
रमाकांत शुक्ला एक सज्जन रेलवे स्टेशन पर बैठे गाड़ी की प्रतीक्षा कर रहे थे तभी जूते पॉलिश करने वाला एक लड़का आकर बोला, ‘‘साहब! बूट पॉलिश...
रमाकांत शुक्ला
Sep 30, 20242 min read


ममता
अभिलाषा कक्कड़ पंडित बृजमोहन जैसे ही नहा कर आये तो स्वयं बहुत ही को असहज सा महसूस करने लगे। पत्नी मंगला ने पूछा कि क्या हुआ तो कहने लगे...
अभिलाषा कक्कड़
Sep 17, 20247 min read


चैन से जीने दो
उर्मिला तिवारी "तुम बिन मैं कुछ नहीं, तुम्हारा साथ हर मुश्किल को पार करने के लिए काफी है। तुम हो, तो मैं हूँ, वरना कुछ भी नहीं।" पढ़ते...
उर्मिला तिवारी
Sep 17, 20244 min read
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