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समस्या और समाधान
डॉ. कृष्ण कांत श्रीवास्तव एक व्यक्ति गाड़ी से उतरा और बड़ी तेज़ी से एयरपोर्ट में घुसा, जहाज़ उड़ने के लिए तैयार था, उसे किसी कार्यकर्म मे...
Rachnakunj .
Oct 21, 20233 min read


बाप हैं मेरे
लक्ष्मी कांत पाण्डेय लालजी किसान आदमी हैं। पढ़े लिखे नहीं मगर समझदार आदमी हैं। भक्ति भाव वाले लालजी संतुष्ट आदमी हैं। बचपन से उनकी एक आदत...
Rachnakunj .
Oct 20, 20236 min read


देवी-दर्शन
विभा गुप्ता "गायत्री, मेरी बात मान ले, तू अपने अखिल की दूसरी शादी कर दे। पोते को गोद में खिलाने का तेरा सपना पूरा हो जायेगा।" पड़ोसिन...
Rachnakunj .
Oct 19, 20233 min read


उम्मीद की पलक
स्वाती छीपा तुम्हारा खिड़की की मुंडेर को रोज उम्मीद से ताकते रहना व्यर्थ है सुमन। वह अब लौट कर नहीं आएगी। यही बात आपने तब भी कही थी...
Rachnakunj .
Oct 19, 20232 min read


आख़िरी मुलाकात
सुनील कुमार आज बाबू जी की तेरहवीं है। नाते-रिश्तेदार इकट्ठे हो रहे हैं पर उनकी बातचीत, हँसी मज़ाक देख-सुनकर उसका मन दुखी हो रहा है.."कोई...
Rachnakunj .
Oct 17, 20233 min read


अपमान
कृष्ण कांत श्रीवास्तव एक बार की बात हैं। गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठकर, उन्हें कुछ समझा रहे थे। बुद्ध के सभी शिष्य, बुद्ध को बड़े...
Rachnakunj .
Oct 17, 20234 min read


पुरुषों का सौंदर्य
अर्चना पाण्डेय मैं फिलहाल बात करना चाहती हूँ पुरुषों पर, जिनके सौंदर्य को हमेशा अनदेखा किया गया है। कुछ पुरुष ऐसे भी होते हैं जो ज़िन्दगी...
Rachnakunj .
Oct 16, 20232 min read


वक़्त
नासिर कोई ताज़ा हवा चली है अभी कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी और ये चोट भी नई है अभी शोर बरपा है ख़ाना-ए-दिल में कोई दीवार सी गिरी है अभी...
Rachnakunj .
Oct 16, 20231 min read


एक सुंदर सीख
कृष्ण कांत श्रीवास्तव एक पत्नी ने अपने पति से आग्रह किया कि वह उसकी छह कमियाँ बताए। जिन्हें सुधारने से वह बेहतर पत्नी बन जाए। पति यह...
Rachnakunj .
Oct 15, 20231 min read


अचूक मंत्र
अनजान एक महिला एक बस में चढ़ी और एक आदमी के बगल में बैठने के क्रम में उसे अपने बैग से कई बार मार दिया। पुरुष चुप रहा, तो महिला ने उससे...
Rachnakunj .
Oct 15, 20232 min read


बरस से बातें
नमिता गुप्ता “मनसी” जाते हुए बरस से बातें, जो कभी कही नहीं गईं सुअवसर के इंतज़ार में ठिठकी रहीं कहने और न कहने के ठीक बीच के अंतराल पर,...
Rachnakunj .
Oct 15, 20231 min read


ब्रह्मसमाज का त्याग
मुकेश ‘नादान’ बहुत समय बीतने के बाद नरेंद्र दक्षिणेश्वर नहीं आए। रामकृष्ण उन्हें देखने के लिए व्याकुल हो उठे। रविवार का दिन था, नरेंद्र...
Rachnakunj .
Oct 13, 20231 min read


डिलीवरी वाला
रमाकांत शुक्ल "उफ्फ...मोबाइल भी गया" मैं मन ही मन बुदबुदाई। मूसलाधार बारिश में रोड पर घुटने तक पानी भर आया। मैं ऑफिस से आज इस कारण लेट भी...
Rachnakunj .
Oct 13, 20232 min read


REFUGEE
Akriti Singh Class IX Allen House Public School, Ghaziabad At dawn came in sinister shadows Suddenly the world went pitch black Not a...
Rachnakunj .
Oct 13, 20231 min read


शीत ऋतु
देवेन्द्र देशज सर-सर पछुआ चल रही, रूप रखी विकराल। सूर्य संग है मित्रता, रातों संग मलाल।। कम्बल से संबल मिला, राहत देती आग। चाहत बढ़ती चाय...
Rachnakunj .
Oct 10, 20231 min read


इनाम का साझेदार
दिनेश कुमार गुप्त राजदरबार से सम्मानित होने के कई दिन बाद गोनू झा ने विचार किया कि अब दरबार में भी जाना चाहिए। राजा ने उन्हें अपना प्रमुख...
Rachnakunj .
Oct 10, 20236 min read


अदल बदल
आचार्य चतुरसेन शास्त्री का उपन्यास चैप्टर 1 माया भरी बैठी थी। मास्टर हरप्रसाद ने ज्योंही घर में कदम रखा, उसने विषदृष्टि से पति को देखकर...
Rachnakunj .
Oct 9, 20234 min read


हरकचंद सावला
हरीश दिवाकर करीब तीस साल का एक युवक मुंबई के प्रसिद्ध टाटा कैंसर अस्पताल के सामने फुटपाथ पर खड़ा था। युवक वहां अस्पताल की सीढिय़ों पर मौत...
Rachnakunj .
Oct 8, 20232 min read


परोपकार की शक्ति
रूप किशोर श्रीवास्तव एक किसान के घर में एक चूहा, एक साँप, एक कबूतर और एक बकरा रहते थे। वे आपस में बहुत अच्छे दोस्त थे। एक दिन किसान चूहे...
Rachnakunj .
Oct 7, 20232 min read


पड़ोसन
रवीन्द्रनाथ ठाकुर मेरी पड़ोसिन बाल-विधवा है। मानो वह जाड़ों की ओस, भीगी पतझड़ी हरसिंगार हो। सुहागरात की फूलों की सेज के लिए नहीं, वह केवल...
Rachnakunj .
Oct 6, 20237 min read


मोहताज
आरती शुक्ला "पम्मी कोचिंग चली गई क्या? रमेश जी ने घर में कदम रखते ही सवाल किया। हां, गई अपने भाई के साथ। मटर के दाने निकालती बड़ी बहन ने...
Rachnakunj .
Oct 6, 20231 min read


सास और बहु
आनंदी त्रिपाठी 'बहू कहां मर गई? अंदर से आवाज- जिंदा हूं माँ जी। तो फिर मेरी चाय क्यों अभी तक नहीं आई, कब से पूजा करके बैठी हूं। ला रही...
Rachnakunj .
Oct 5, 20235 min read


गुरु-शिष्य का प्रेम
मुकेश ‘नादान’ एक दिन श्रीरामकृष्ण व्याकुल भाव से मंदिर के प्रंगण में घूम रहे थे और माँ काली से विनती कर रहे थे, “माँ! मैं उसे देखे बिना...
Rachnakunj .
Oct 5, 20232 min read


अच्छा लगा
डॉ. भरत सरन यह देखकर की जयपुर के एक कॉफी हाउस पर एक उम्र दराज व्यक्ति अपने हाथ में एक किताब लेकर कुछ पढ़ रहे थेl देख कर काफी अच्छा लगा,...
Rachnakunj .
Oct 4, 20231 min read
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