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नगाड़ों में तूती-नाद
सत्येंद्र तिवारी स्वतंत्र हो गए हैं हम स्वतंत्र हो गए, खुदगर्ज मकसद का प्रजातंत्र हो गए। हर गांव की डगर-डगर शहरों की हर गली माता-पिता बहन...
सत्येंद्र तिवारी
Feb 2, 20241 min read


कसूर
हरिशंकर गोयल रोहित अपनी दुकान पर बैठा-बैठा मोबाइल में कुछ वीडियो देख रहा था। आजकल बहुत सारी लड़कियां पैसा कमाने के चक्कर में ऊलजलूल...
हरिशंकर गोयल
Feb 1, 20245 min read


परिस्थितियां
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव एक घर के पास काफी दिन से एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था। वहां रोज मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे एक दूसरे की शर्ट...
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Feb 1, 20242 min read


नई-पड़ोसन
मंजू यादव 'किरण' अभी छ: महीने पहले मेरे पड़ोस में शर्मा परिवार नया-नया रहने आया है। उनका भरा-पूरा परिवार है। यानी कि वो खुद, उनकी...
Rachnakunj .
Feb 1, 20243 min read


मंगल कामनाएँ
प्रतिभा गुप्ता खिल उठीं पलकें सुनहरे स्वप्न का प्रतिमान आया। आस की लेकर नयीं किरणें नया दिनमान आया।। जिस तरफ देखो दुआओं के गुलों की...
प्रतिभा गुप्ता
Feb 1, 20241 min read


अपना बचपन
शंकर पांडे पुराने चौक चौबारे मुहब्बत से बुलाते हैं। चलो न गाँव को हम फिर से वापस लौट जाते हैं। जहाँ पर छोड़ आए थे वो कच्चे आम की डाली।...
शंकर पांडे
Feb 1, 20241 min read


सुन्दरता
डॉ. विभा कुमारी सिंह "खरोंची हुई पीठ छुपाने के लिए बंद गले की ब्लाउज पहनती हो और कहती हो कि खुले गले पसंद नहीं।" शारदा ने अपनी देवरानी...
डॉ. विभा कुमारी सिंह
Jan 31, 20242 min read


बटवारा
लक्ष्मी कुमावत आज घर में एक छोटा सा फंक्शन था। नेहा ने अभी अट्ठाईस दिन पहले ही एक बेटी को जन्म दिया है, बस उसी का कुआं पूजन था। नेहा के...
लक्ष्मी कुमावत
Jan 31, 20247 min read


मेरा कवि मेरा कमाल
(एक व्यंग) डॉ. जहान सिंह “जहान” आजकल कवि क्या कमाल करते हैं। शब्दों की भीड़ शब्दों का धरना शब्दों का प्रदर्शन कर साहित्य का ट्रैफिक जाम...
डॉ. जहान सिंह “जहान”
Jan 25, 20242 min read


पटाखा
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव “वाह! क्या लगती हो! इस उम्र में भी बिलकुल पटाखा हो पटाखा।” गली में तेज-तेज कदमों से अपने घर की ओर जाती हुई...
Rachnakunj .
Jan 24, 20242 min read


मेरी बेटी
भारती देसाई एक बेटी मेरे घर में भी आई है..... सिर के पीछे उछाले गये चावलों को, माँ के आँचल में छोड़कर, पाँव के अँगूठे से चावल का कलश...
Rachnakunj .
Jan 24, 20242 min read


पोथी-पत्री
ऋतु अग्रवाल सरला भाभी और महेश भैया हमारी ही फ्लैट के बगल में रहते हैं। महेश भैया बाजार में कपड़ों की दुकान चलाते थे। बड़े मजे में उनके...
Rachnakunj .
Jan 23, 20241 min read


फर्ज
रश्मि प्रकाश “भाभी-भाभी कहाँ हो आप, अरे जल्दी से बाहर आओ ना।” नैना अपनी भाभी राशि को इधर-उधर खोजते हुए बोले जा रही थी। “क्या हुआ नैना आ...
Rachnakunj .
Jan 23, 20242 min read


मुस्कान खिल उठी…
संगीता फाइलें तैयार कर रिचा बॉस के केबिन में पहुंची, तो पता चला कि वे घर के लिए निकल चुके हैं। “ओह, लगता है जल्दी में भूल गए। चलो, उनका...
Rachnakunj .
Jan 22, 20249 min read


ख्वाब
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव रोटी की भाग दौड़ में मैं, प्यार जताना भूल गया। सिर पर कामों का बोझ लाद, मैं दिन भर फिरता रहता था। जीवन की...
Rachnakunj .
Jan 22, 20241 min read


अनोखा अनुभव
रमाकांत अवस्थी आज हेम और हरि दोनों के बीच जबरदस्त विचार-विमर्श चल रहा था। मंहगाई, सरकारी सेवा करते चैनल से होकर बातचीत सच्चे संस्मरण तक आ...
Rachnakunj .
Jan 22, 20244 min read


तुम हो तो मैं हूँ
त्रिलोचन कौर बहुत बड़े घर की खिड़की के अन्दर से माथुर दम्पति की झाँकती दो जोड़ी उदास बूढ़ी आँखे, फोन पर आँखे टिकाये, बेटे विराज के...
Rachnakunj .
Jan 22, 20242 min read


अनहोनी
चिन्मय देशपाण्डे आलोक साहब अपनी सुंदर, सुघड़, विदुषी पत्नी के साथ ऑफिस की सालाना पार्टी में जैसे ही पधारे कइयों के सीने पर सांप लोट गए।...
Rachnakunj .
Jan 20, 20244 min read


नफ़रत
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक आदमी ने एक बहुत ही खूबसूरत लड़की से शादी की। शादी के बाद दोनों की ज़िन्दगी बहुत प्यार से गुजर रही थी। वह उसे...
Rachnakunj .
Jan 20, 20242 min read


खाली कश्ती लाख थपेड़े
डॉ. जहांन सिंह “जहांन” गरीबी और बेरोजगारी को लादे, जीवन में कुछ करने की तीव्र इच्छा लिये एक नौजवान कानपुर आता है। एक पिछड़े गाँव एवं अभाव...
Rachnakunj .
Jan 14, 20245 min read
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