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मातृभाषा की मौत
जसिंता केरकेट्टा माँ के मुँह में ही मातृभाषा को क़ैद कर दिया गया और बच्चे उसकी रिहाई की माँग करते-करते बड़े हो गए। मातृभाषा ख़ुद नहीं मरी...
जसिंता केरकेट्टा
Jul 14, 20241 min read


स्त्री की हत्या
अदनान कफ़ील दरवेश कुर्सियाँ उल्टी पड़ी हैं तंदूर बुझ चुका है आस-पास पानी गिरने से ज़मीन काफ़ी हँचाड़ हो गई है पत्तलों के ऊढे़ लगे हुए हैं...
अदनान कफ़ील दरवेश
Jul 3, 20242 min read


एक पेड़ हमने लगाया
अशोक कुमार बाजपेई अब गति आगे बढ़ाओ एक पेड़ हमने लगाया एक तुम लगाओ पंक्ती को बनाओ पांति को सजाओ एक पेड़ हमने लगाया एक तुम लगाओ यहां से...
अशोक कुमार बाजपाई
Jun 15, 20241 min read


क्या कुछ बदला
सन्दीप तोमर क्या कुछ बदला मेरे होने या न होने से धरती आज भी उसी रफ्तार से घूम रही है चाँद भी उसी तरह अपनी चाँदनी बिखेर रहा है ध्वल रोशनी...
सन्दीप तोमर
May 13, 20241 min read


संभावनाएँ
कुँवर नारायण लगभग मान ही चुका था मैं मृत्यु के अंतिम तर्क को कि तुम आए और कुछ इस तरह रखा फैलाकर जीवन के जादू का भोला-सा इंद्रजाल कि लगा...
कुँवर नारायण
May 11, 20241 min read


मोबाइल पर मुन्ना
अशोक कुमार बाजपाई मोबाइल पर मुन्ना बतलाता बाबा जी को बहुत सुहाता सुनता नहीं काम की बातें मोबाइल में कटती रातें। जाने कहां की बातें लाता...
अशोक कुमार बाजपाई
Apr 11, 20241 min read


नर हो, न निराश करो मन को
मैथिलीशरण गुप्त नर हो, न निराश करो मन को कुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रह कर कुछ नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें यह व्यर्थ...
मैथिलीशरण गुप्त
Apr 10, 20241 min read


एक व्यक्ति
विनोद कुमार शुक्ल हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था व्यक्ति को मैं नहीं जानता था हताशा को जानता था इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया मैंने हाथ...
विनोद कुमार शुक्ल
Mar 29, 20241 min read


तुम्हारे साथ रहकर
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि दिशाएँ पास आ गई हैं, हर रास्ता छोटा हो गया है, दुनिया सिमटकर एक...
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
Mar 9, 20241 min read


My Lovely Son
Jyoti Sriram My Lovely Son The tapestry of life woven with incredible happiness and love Bestowed on me by a sweet bundle of joy; a part...
Jyoti Sriram
Mar 6, 20241 min read


अंतिम ऊँचाई
कुँवर नारायण कितना स्पष्ट होता आगे बढ़ते जाने का मतलब अगर दसों दिशाएँ हमारे सामने होतीं, हमारे चारों ओर नहीं। कितना आसान होता चलते चले...
कुँवर नारायण
Feb 25, 20241 min read


यादों के झरोखे से…
डॉ. जहान सिंह “जहान” कोई यहां रहता था। वैसे इस रास्ते से कम गुजरता हूं। डरता हूं मेरे चेहरे पर उसका कोई नाम ना पढ़ ले। बस्तियों का क्या...
डॉ. जहान सिंह “जहान”
Feb 25, 20242 min read


मेरी प्यारी अम्मा जी
डॉ सुषमा सुबह सबेरे जब चिल्लाती मेरी प्यारी अम्मा जी। खाट खड़ी सबकी करवाती मेरी प्यारी अम्मा जी। नीम बबुर की दतुइन तोड़ के सुबह सुबह हम...
डॉ सुषमा
Feb 22, 20241 min read


महंगाई की मार
मुदित अग्रवाल महंगाई की मार जनता हो रही है बरवाद इसको कौन बचाएगा महंगाई की बढ़ रही मार जीवन कैसे कट पायेगा। महंगाई तो बढ़ती जा रही बढ़ते...
मुदित अग्रवाल
Feb 2, 20241 min read


परिंदे की दास्तां
धीरज सिंह उड़ जा पंछी दूर गगन में वो ही तेरा बसेरा है, इस धरती पर और इस जग में कोई नहीं अब तेरा है। आसमां तुझे हाथ फैला कर पल भर में अपना...
धीरज सिंह
Feb 2, 20241 min read


जिंदगी
सुरेंद्र गुप्त सीकर मेरे संग आगे-आगे जाती हुई लड़की मेरे संग पीछे-पीछे आती हुई लड़की रोती हुई रूठी और मनाती हुई लड़की पल-पल मृदु मुस्काती...
सुरेंद्र गुप्त सीकर
Feb 2, 20241 min read


समर्पण
प्राची मिश्रा आराधन तुम प्रियवर मेरा हियवंदन नित करते जाना जीवन का तुम आधार प्रिये तृण तृण हमको ढलते जाना। किस ओर चला ये मन मेरा किसने...
प्राची मिश्रा
Feb 2, 20241 min read


मृगतृष्णा
जे. पी. डिमरी जल विहीन धरती जलमय सी, मृगतृष्णा कहलाती है, प्यास पथिक की बढ़ा-बढ़ा, जीवन का नाच नचाती है। रश्मि-परिवर्तन से भ्रमिक,...
जे. पी. डिमरी
Feb 2, 20241 min read


प्यार के एहसास
संदीप यह कहानी तेरी मेरी है। किसी और की नहीं इसमे मैं राजा तू रानी है। अपनी शुरू होती कुछ ऐसे कहानी है, किसी और की नहीं। एक प्यारी सी...
संदीप
Feb 2, 20241 min read


नगाड़ों में तूती-नाद
सत्येंद्र तिवारी स्वतंत्र हो गए हैं हम स्वतंत्र हो गए, खुदगर्ज मकसद का प्रजातंत्र हो गए। हर गांव की डगर-डगर शहरों की हर गली माता-पिता बहन...
सत्येंद्र तिवारी
Feb 2, 20241 min read
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