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परिंदे की दास्तां
धीरज सिंह उड़ जा पंछी दूर गगन में वो ही तेरा बसेरा है, इस धरती पर और इस जग में कोई नहीं अब तेरा है। आसमां तुझे हाथ फैला कर पल भर में अपना...
धीरज सिंह
Feb 2, 20241 min read


जिंदगी
सुरेंद्र गुप्त सीकर मेरे संग आगे-आगे जाती हुई लड़की मेरे संग पीछे-पीछे आती हुई लड़की रोती हुई रूठी और मनाती हुई लड़की पल-पल मृदु मुस्काती...
सुरेंद्र गुप्त सीकर
Feb 2, 20241 min read


समर्पण
प्राची मिश्रा आराधन तुम प्रियवर मेरा हियवंदन नित करते जाना जीवन का तुम आधार प्रिये तृण तृण हमको ढलते जाना। किस ओर चला ये मन मेरा किसने...
प्राची मिश्रा
Feb 2, 20241 min read


मृगतृष्णा
जे. पी. डिमरी जल विहीन धरती जलमय सी, मृगतृष्णा कहलाती है, प्यास पथिक की बढ़ा-बढ़ा, जीवन का नाच नचाती है। रश्मि-परिवर्तन से भ्रमिक,...
जे. पी. डिमरी
Feb 2, 20241 min read


प्यार के एहसास
संदीप यह कहानी तेरी मेरी है। किसी और की नहीं इसमे मैं राजा तू रानी है। अपनी शुरू होती कुछ ऐसे कहानी है, किसी और की नहीं। एक प्यारी सी...
संदीप
Feb 2, 20241 min read


नगाड़ों में तूती-नाद
सत्येंद्र तिवारी स्वतंत्र हो गए हैं हम स्वतंत्र हो गए, खुदगर्ज मकसद का प्रजातंत्र हो गए। हर गांव की डगर-डगर शहरों की हर गली माता-पिता बहन...
सत्येंद्र तिवारी
Feb 2, 20241 min read


मंगल कामनाएँ
प्रतिभा गुप्ता खिल उठीं पलकें सुनहरे स्वप्न का प्रतिमान आया। आस की लेकर नयीं किरणें नया दिनमान आया।। जिस तरफ देखो दुआओं के गुलों की...
प्रतिभा गुप्ता
Feb 1, 20241 min read


अपना बचपन
शंकर पांडे पुराने चौक चौबारे मुहब्बत से बुलाते हैं। चलो न गाँव को हम फिर से वापस लौट जाते हैं। जहाँ पर छोड़ आए थे वो कच्चे आम की डाली।...
शंकर पांडे
Feb 1, 20241 min read


मेरा कवि मेरा कमाल
(एक व्यंग) डॉ. जहान सिंह “जहान” आजकल कवि क्या कमाल करते हैं। शब्दों की भीड़ शब्दों का धरना शब्दों का प्रदर्शन कर साहित्य का ट्रैफिक जाम...
डॉ. जहान सिंह “जहान”
Jan 25, 20242 min read


मेरी बेटी
भारती देसाई एक बेटी मेरे घर में भी आई है..... सिर के पीछे उछाले गये चावलों को, माँ के आँचल में छोड़कर, पाँव के अँगूठे से चावल का कलश...
Rachnakunj .
Jan 24, 20242 min read


ख्वाब
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव रोटी की भाग दौड़ में मैं, प्यार जताना भूल गया। सिर पर कामों का बोझ लाद, मैं दिन भर फिरता रहता था। जीवन की...
Rachnakunj .
Jan 22, 20241 min read


खुद को पढ़ रहा हूँ
सन्दीप तोमर मैं बन्द कमरे में खुद को पढ़ रहा हूँगा या कि गर्मी की रात छत पर लेट महसूस रहा हूँगा तपिश तुम्हारी और ताक रहा हूँगा तारों को...
Rachnakunj .
Jan 13, 20241 min read


किस घर की बेटी
अनजान (एक कवि नदी के किनारे खड़ा था। तभी वहाँ से एक लड़की का शव नदी में तैरता हुआ जा रहा था। तो तभी कवि ने उस शव से पूछा ----) कौन हो तुम...
Rachnakunj .
Jan 6, 20241 min read


यादों और सौगातों में नीम
मधु मधुलिका ऐ नीम कैसे करूँ तुम्हारा वर्णन मैं कैसे बताउँ तुम्हारी उपयोगिता तुम्हारा सौन्दर्य अनुपम है सूरज भी तुम्हारे दरख्तों से झांक...
Rachnakunj .
Jan 3, 20241 min read


मेरा कवि मेरा कमाल
(एक व्यंग) डॉ. जहान सिंह “जहान” आजकल कवि क्या कमाल करते हैं। शब्दों की भीड़ शब्दों का धरना शब्दों का प्रदर्शन कर साहित्य का ट्रैफिक जाम...
Rachnakunj .
Dec 5, 20231 min read


सच की राह
मधु मधुमन ख़ामियाँ ही न गिनवाइए कुछ तो अच्छा भी बतलाइए चाहे कितनी भी हो मुश्किलें राह सच की ही अपनाइए जब किया ही नहीं कुछ ग़लत क्यूँ किसी...
Rachnakunj .
Nov 17, 20231 min read


नगाड़ों में तूती-नाद
सत्येंद्र तिवारी स्वतंत्र हो गए हैं हम स्वतंत्र हो गए, खुदगर्ज मकसद का प्रजातंत्र हो गए। हर गांव की डगर-डगर शहरों की हर गली माता-पिता बहन...
Rachnakunj .
Nov 12, 20231 min read


इंकलाब लिखता हूँ।
अमरेन्द्र मैं जो भी लिखता हूँ, इंकलाब लिखता हूँ। किसी के दुख-दर्द से, जुड़ा सवाल लिखता हूँ। मैं तो बस इतना ही, काम करता हूँ। हर अन्याय के...
Rachnakunj .
Nov 1, 20231 min read


वक़्त
नासिर कोई ताज़ा हवा चली है अभी कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी और ये चोट भी नई है अभी शोर बरपा है ख़ाना-ए-दिल में कोई दीवार सी गिरी है अभी...
Rachnakunj .
Oct 16, 20231 min read


बरस से बातें
नमिता गुप्ता “मनसी” जाते हुए बरस से बातें, जो कभी कही नहीं गईं सुअवसर के इंतज़ार में ठिठकी रहीं कहने और न कहने के ठीक बीच के अंतराल पर,...
Rachnakunj .
Oct 15, 20231 min read
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