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बिछुड़न
मिलना और बिछुड़ना दोनों
जीवन की मजबूरी है।
उतने ही हम पास रहेंगे,
जितनी हममें दूरी है।।
शाखों से फूलों की बिछुड़न
फूलों से पंखुड़ियों की।
आँखों से आँसू की बिछुड़न
होंठों से बाँसुरियों की।।
तट से नव लहरों की बिछुड़न
पनघट से गागरियों की।
सागर से बादल की बिछुड़न
बादल से बीजुरियों की।।
जंगल जंगल भटकेगा ही
जिस मृग पर कस्तूरी है।
सोनी शुक्ला
Jan 31 min read


पिता की दौलत
यह कहानी एक गहरी भावनात्मक और जीवन-मूल्य से भरी सामाजिक सच्चाई को उजागर करती है। कहानी की शुरुआत एक गांव में अकेले रह रहे बूढ़े पिता की मृत्यु से होती है। उनके दोनों बेटे, जो रोज़गार और भविष्य के लिए अलग-अलग शहरों में बस चुके थे, पिता के अंतिम संस्कार के लिए गांव आते हैं। सारे धार्मिक और सामाजिक कर्मकांड पूरे हो जाते हैं। गांव के कुछ लोग जा चुके होते हैं और कुछ अभी बैठे होते हैं, तभी बड़े भाई की पत्नी अपने पति के कान में कुछ फुसफुसाती है।
इसके बाद बड़े भाई अपने छोटे भाई को भी
श्रद्धा पटेल
Jan 23 min read


कफ़न
प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “कफ़न” भारतीय ग्रामीण समाज की कठोर सच्चाइयों, गरीबी, संवेदनहीनता और सामाजिक व्यवस्था की विडंबना को उजागर करती है। कहानी के मुख्य पात्र घीसू और माधव हैं, जो बाप–बेटा हैं और अत्यंत निर्धन तथा कामचोर स्वभाव के हैं। वे समाज के हाशिए पर जीवन जीते हैं और मेहनत से दूर भागते हैं।
यह कहानी गरीबी से उपजे नैतिक पतन, सामाजिक अन्याय और मानवीय मूल्यों के क्षरण पर तीखा व्यंग्य करती है।
पूरी कहानी जानने के लिए पढ़ें : प्रेमचंद की लिखी कहानी कफ़न ?
प्रेमचंद
Jan 210 min read


अपनों के बीच
कई बार
लौटते-लौटते
बहुत देर हो जाती है।
इतनी देर कि
हम खुद को भी
पहचान नहीं पाते।
अपना पता भी
ढूंढ़ नहीं पाते।
अपना शहर, अपनी गलियां
भूल चुकी होती हैं हमें।
खत्म हो चुके होते हैं
जाने कितने जन्म,
जाने कितने रिश्ते।
और इस तरह
हमारा लौटना,
लौटना नहीं होता।
हम सिर्फ आ जाते हैं
अनचाहे और अनजाने से
उन अपनों के बीच,
जिन्होंने कभी
हमारे लौट आने की
जाने कितनी दुआएं मांगी थीं
करुणा शंकर अवस्थी
Jan 1, 20261 min read


कृतज्ञता
इस वक्त कौन हो सकता है। अचानक किसी ने जोर से दरवाजा खटखटाया और लगातार खटखटाता रहा। "इस वक्त कौन हो सकता है?" प्रिया ने सोचा और बगल में सो रहे अपने पति हर्ष को जगाया। हर्ष भी इतनी जोर से दरवाजा खटखटाने की आवाज से जगा - जगा सा तो हो ही गया था और प्रिया के हिलाने से तुरंत उठकर बैठ गया और घबराई हुई नजरों से प्रिया की ओर देखा।
शंकर लाल वर्मा
Jan 1, 20262 min read


कड़वी बहु
जानकी के बहु बेटे शहर में बस चुके थे लेकिन उसका गाँव छोड़ने का मन नहीं हुआ इसलिए अकेले ही रहती थी। वह रोजाना की तरह मंदिर जा कर आ रही थी। रास्ते मे उसका संतुलन बिगड़ा और गिर पड़ी।
गाँव के लोगों ने उठाया, पानी पिलाया और समझाया 'अब इस अवस्था में अकेले रहना उचित नहीं। किसी भी बेटे के पास चली जाओ।' जानकी ने भी परिस्थिति को स्वीकार कर बेटे बहुओं को ले जाने के लिए कहने हेतु फोन करने का मन बना लिया।
रमेश चंद्रा
Jan 1, 20262 min read


देवांगना
आज से ढाई हज़ार वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों को ब्रह्मचर्य और सदाचार की शिक्षा देकर बहुत जनों के हित के लिए, बहुत जनों के सुख के लिए, लोक पर दया करने के लिए, देव-मनुष्यों के प्रयोजन-हित सुख के लिए संसार में विचरण करने का आदेश दिया। वह 44 वर्षों तक, बरसात के तीन मासों को छोड़कर विचरण करते और लोगों को धर्मोपदेश देते रहे। उनका यह विचरण प्रायः सारे उत्तर प्रदेश और सारे बिहार तक ही सीमित था। इससे बाहर वे नहीं गये। परन्तु उनके जीवनकाल में ही उनके शिष्य भारत के अनेक भागों म
आचार्य चतुरसेन
Dec 29, 20253 min read


इन्द्रजाल
विन्ध्याचल के गहन कानन के बीच कान्तार-गामिनी युवती के बढ़ते हुए पद इस मर्मस्पर्शी सम्बोधन-स्वर को सुनते ही सहसा स्तम्भित हो गए। उसने चकित होकर चतुर्दिश पर्यालोचन किया तो पादुका-विहीन पद-चिह्नों से अकित मालुधान तुल्य क्षीण कान्तार की अपेक्षा उसे और कुछ दृष्टिगत न हुआ ।
रघुनाथ सिंह
Dec 29, 20252 min read


विचार स्नान
मैं सुंदर हो गया हूँ।
त्याग कर मनमैल।
मैं निर्मल हो गया हूँ।
मैं फिर सुंदर हो गया हूँ।।
कितना सुघड़ है ये पात्र खाली
कितना मधुर संगीत इसका।
डॉ. जहान सिंह ‘जहान’
Dec 28, 20251 min read


बदलाव
बूढ़े दादा जी को उदास बैठे देख बच्चों ने पूछा, “क्या हुआ दादा जी, आज आप इतने उदास बैठे क्या सोच रहे हैं?”
“कुछ नहीं, बस यूँही अपनी ज़िन्दगी के बारे में सोच रहा था।”, दादा जी बोले।
“जरा हमें भी अपनी लाइफ के बारे में बताइये न।”, बच्चों ने ज़िद्द्द की।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Dec 28, 20252 min read


रिश्तों की असली कीमत
पत्नी रचना ने जज के सामने ठंडे स्वर में कहा, “मुझे तलाक मंजूर है, लेकिन इसके बदले मुझे एक लाख रुपए चाहिए।”
पूरा कोर्टरूम सन्न रह गया। सबकी नजरें उस व्हीलचेयर पर बैठे विशाल की ओर मुड़ गईं। उसकी आँखों में कोई शिकवा नहीं था, बस एक गहरी चुप्पी थी।
दीपक दिवाकर
Dec 28, 20255 min read


गलती का एहसास
एक बार एक बहुत बड़ा व्यापारी एक छोटे से गांव में जाता है। उसका उद्देश्य होता है कि उस गांव में एक बड़ी सी फैक्ट्री लगानी है। वह एक ऐसी जगह पर पहुंच जाता है, जहां पर उसके सामने एक नदी होती है और उस नदी के सामने वह गांव होता है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Dec 27, 20253 min read


एक कहानी बड़ी सुहानी
ऑफिस से निकल कर शर्मा जी ने स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि उन्हें याद आया.. पत्नी ने कहा था 1 किलो जामुन लेते आना।
तभी उन्हें सड़क किनारे बड़े और ताज़ा जामुन बेचते हुए एक बीमार सी दिखने वाली बुढ़िया दिख गयी। वैसे तो वह फल हमेशा राम आसरे फ्रूट भण्डार से ही लेते थे, पर आज उन्हें लगा कि क्यों न बुढ़िया से ही खरीद लूँ?
संतोष श्रीवास्तव
Dec 27, 20253 min read


इंतज़ार की बरसात
छोटे से शहर के कॉलेज में जब अदिति ने कदम रखा, तो उसकी आँखों में बड़े-बड़े सपने थे। उसकी सादगी और मासूमियत ने कॉलेज में आते ही सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं दूसरी ओर, राघव कॉलेज का सबसे लोकप्रिय लड़का था - स्मार्ट, हैंडसम, और दिल का बहुत अच्छा। लेकिन राघव को प्यार पर विश्वास नहीं था। उसके लिए बस दोस्ती और मस्ती ही थी।
लक्ष्मी सारस्वत
Dec 26, 20252 min read


सच्चा सुख
राजकुमार विजय और सविता की शादी को पचास साल पूरे हो चुके थे। दोनों की उम्र अब पचहत्तर से ऊपर थी, और इन सालों में उन्होंने हंसी-खुशी और प्यार भरी जिंदगी साथ बिताई थी। समय के साथ, उनके बीच का रिश्ता गहराता गया था, मानो दोनों सच में "दो जिस्म, एक जान" बन गए हों। सविता ने विजय के साथ हर सुख-दुख बांटा था। उनके बीच में शायद ही कोई राज हो, लेकिन एक राज ऐसा था, जो सविता ने कभी विजय को नहीं बताया था। उनकी अलमारी के सबसे ऊपरी हिस्से में एक पुराना जूतों का बॉक्स रखा था। सविता ने विजय क
राजकुमार
Dec 26, 20252 min read


चमत्कारी गुलाब
कभी कभी कुछ बाते इंसान की समझ से बहुत दूर होती है। ऐसी ही बिलकुल समझ से बाहर थी रानी चित्रा। रानी चित्रा किसी चमत्कार से कम नहीं थी। कारण था रानी की सुंदरता। कहते थे रानी ने उम्र को बंदी बना लिया है।
सपना चौधरी
Dec 25, 20254 min read


निस्वार्थ प्रेम
रवि की बहन की शादी को सात साल हो चुके थे। उसने कभी बहन के ससुराल जाने की जरूरत महसूस नहीं की थी, हालांकि उसके माता-पिता त्योहारों पर कभी-कभी वहां जाया करते थे।
हेमा सिंह
Dec 25, 20252 min read


एक भिखारी
मालती त्रिपाठी पटना जंक्शन के बाहर फुटपाथ पर एक 25 साल की महिला बैठी थी। उसका चेहरा थका हुआ, आंखों के नीचे काले घेरे, होठ सूखे और कपड़े मैले-कुचैले थे। खूबसूरत तो थी, लेकिन हालात ने उसकी खूबसूरती को छुपा दिया था। वह राहगीरों से भीख मांगती, कभी पानी के लिए गुहार लगाती। लोग अक्सर उसे अनदेखा कर चले जाते, कोई सिक्का फेंक देता और कोई तिरस्कार से देखता। इसी भीड़ में एक दिन एक चमचमाती गाड़ी आकर रुकी। उसमें से एक 30 साल का युवक उतरा - साधारण कपड़े, चेहरे पर गंभीरता और आंखों में अपन
मालती त्रिपाठी
Dec 24, 20253 min read


हादसा
संगीता अग्रवाल हैदराबाद की भीड़भाड़ भरी गलियों में एक मासूम बच्चा आर्यन फुटपाथ पर बैठा था। उसकी उम्र मुश्किल से 8 साल थी, लेकिन उसके चेहरे पर बचपन की मासूमियत से ज्यादा भूख और बेबसी की लकीरें साफ नजर आती थीं। फटे कपड़े, नंगे पैर और खाली आंखों में हजारों सपने। आर्यन कभी अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से किराए के कमरे में रहता था। उसके पिता सत्यपाल मजदूरी करते थे और मां सुनीता सिलाई करती थीं। गरीब जरूर थे, लेकिन बेटे के लिए बड़े-बड़े सपने थे। सत्यपाल हमेशा कहते थे - ”आर्यन पढ़
संगीता अग्रवाल
Dec 24, 20253 min read


भाग्य का खेल
बहुत समय पहले की बात है, एक धनी सेठ जी थे। उनके पास बेशुमार संपत्ति थी, मान-सम्मान और शानो-शौकत की कोई कमी नहीं थी। सेठ जी की एक सुंदर और संस्कारी बेटी थी। उन्होंने अपनी बेटी का विवाह एक प्रतिष्ठित परिवार में किया, जहाँ सभी सुविधाएँ उपलब्ध थीं। किंतु बेटी का दुर्भाग्य देखिए, उसका पति निकला एक जुआरी और शराबी। धीरे-धीरे उनकी सारी संपत्ति जुए और शराब में लुटती चली गई। अब बेटी के पास ना तो पैसा था और ना ही सुख-शांति।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Dec 18, 20253 min read
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