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जनता को मूर्ख बनाते हैं
रमेश चंद शर्मा सावधान जनता समझ रही है स्वदेशी के गीत गाते थे, स्वदेशी नाम से ललचाते थे, स्वदेशी आन्दोलन चलाते थे, सड़कों पर नजर आते थे, अफवाह, झूठ खूब फैलाते हैं, अब क्या कर रहे हो भाई।। बिना बुलाए आते थे, झूठा संवाद चलाते थे, झूठी कसमें खाते थे, नारे खूब लगाते थे, सत्ता के लिए छटपटाते थे, सत्ता कैसे भी पाते है।। जनता को मूर्ख बनाते है, ढोंग खूब रचाते है, वादे नहीं निभाते है, जुमले उन्हें बताते है, अपने को भगत कहलाते हैं, अब चेहरा सामने आया है।। सत्ता जब से हाथ आई, स्व
रमेश चंद शर्मा
Nov 20, 20252 min read


इज्जत और इंसानियत
गोपाल चंद्र सर्दियों की सुबह थी। मुंबई एयरपोर्ट पर भीड़ अपने चरम पर थी। बिजनेस ट्रैवलर्स लैपटॉप लेकर भाग रहे थे, परिवार छुट्टियों पर जाने को तैयार थे और हर तरफ चकाचौंध थी। इसी भीड़ में एक बुजुर्ग महिला, श्रीमती विमला देवी, धीरे-धीरे चलते हुए एयरलाइंस के काउंटर तक पहुंची। उनका पहनावा सादा था - एक सूती साड़ी, ऊपर पुराना शॉल और पैरों में साधारण चप्पलें। हाथ में एक प्लास्टिक कवर में रखी प्रिंटेड टिकट थी। चेहरे पर शांति थी, लेकिन आंखों में थकान भी थी। उन्हें बस सीट कंफर्म होने का
गोपाल चंद्र
Nov 20, 20256 min read


सौदा
अंजलि शर्मा इस बड़े शहर में एक छोटा सा कॉस्मेटिक शॉप है मेरा। पति ने खोला था मेरे नाम पर। झुमकी श्रृंगार स्टोर। आज एक नया जोड़ा आया है मेरे दुकान पर। स्टाफ ने बताया कि सुबह से दूसरी बार आये हैं। एक कंगन इन्हें पसंद है पर इनके हिसाब से दाम ज्यादा है। इन्हें देख इस दुकान की नींव, मेरा वजूद, और अपनी कहानी याद आ गई। ऐसे ही शादी के बाद पहली बार हम एक मेले में साथ गए थे। मुझे काँच की चूड़ियों का एक सेट पसंद आया था। तब आठ रुपये की थी और हम ले ना पाए थे। ये बार बार पाँच रुपये की बात कर
अंजलि शर्मा
Nov 19, 20252 min read


सिर्फ तेरे लिए
काजल शर्मा वो चूड़ियाँ जो सिर्फ़ तेरे लिए पहनी थी! कहाँ शौक था मुझे, सजने-सवरने का। नैनो में काला काजल, तो माथे पे बिंदिया लगाने का। तुझे देख पलकें झुकाने, और मुस्कुराने शर्माने का। कहाँ शौक था मुझे, खुद को एक युवती बनाने का। हाथों में चूड़ी, पैरों में पायल छनकाने का। केशों को खुला छोड़, ज़ुल्फों को पीछे हटाने का। कहाँ शौक था मुझे, खुद में शार्मो हया लाने का। हाँ! ये चूड़ियाँ सिर्फ़ तेरे लिए पहनी थी, अंदाज़ था मेरा तुझे इशारों में बुलाने का। दुपट्टे को सलीके से ओढ़, इस दफा
काजल शर्मा
Nov 19, 20251 min read


समय-प्रबंधन
डॉo कृष्ण कांत श्रीवास्तव इस संसार में मौसम आते हैं और जाते हैं, मनुष्य आते हैं और जाते हैं, समाज बनता है और बिगड़ता है, पर समय बिना रुके सदा चलता रहता है। समय को कोई पकड़ नहीं सकता। हम जितना उसके पीछे दौड़ते हैं वह उतना ही आगे भाग जाता है। यह बहुत बड़ी विडंबना है कि हम समय का महत्व जानते हुए भी उसे व्यर्थ के कार्यों में जाया करते रहते हैं। समय-प्रबंधन की असमर्थता ही इसका मूल कारण है। हम यह भूल जाते हैं कि जीवन-प्रबंधन के लिए, व्यक्तित्व निर्माण के लिए और कार्यक्षेत्र में सफ
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Nov 18, 20257 min read


समझदार व्यापारी
हीरालाल मशालो का एक व्यापारी था, जो शहर-शहर जाकर मशाले बेचा करता था। एक दिन उसकी तबीयब बहुत खराब हो गयी जिस कारण वह मशाले बेचने नहीं जा पाता है।
हरिशंकर परसाई
Nov 18, 20253 min read


चौथा मित्र
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक गाँव में चार मित्र रहते थे। उनमें से तीन पढ़े-लिखे व विद्वान थे परंतु चौथा इतना विद्वान नहीं था, पर हर बात की सामान्य जानकारी रखता था। वह काफी व्यावहारिक था और अपने अच्छे-बुरे की समझ रखता था। एक दिन तीनों मित्रों ने तय किया कि उन्हें अपने ज्ञान के बल पर धन कमाना चाहिए। वे अपनी किस्मत आजमाने के लिए दूसरे देश के लिए चल पड़े। वे चौथे दोस्त को साथ नहीं ले जाना चाहते थे क्योंकि वह अधिक पढ़ा-लिखा नहीं था लेकिन बचपन का दोस्त होने के नाते उसे भी साथ ले ल
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Nov 4, 20252 min read


महान् गणितज्ञ रामानुजन : धुन के पक्के
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव रामानुजन का जन्म एक गरीब परिवार में 22 दिसम्बर, 1887 को तमिलनाडु के इरोड़ कस्बे में हुआ था। उनके पिता एक साड़ी की दुकान पर क्लर्क का काम करते थे। रामानुजन के जीवन पर उनकी माँ का बहुत प्रभाव था। जब वे 11 वर्ष के थे, तो उन्होंने गणित की किताब की पूरी मास्टरी कर ली थी। गणित का ज्ञान तो जैसे उन्हें ईश्वर के यहाँ से ही मिला था। 14 वर्ष की उम्र में उन्हें मेरिट सर्टीफिकेट्स एवं कई अवार्ड मिले। वर्ष 1904 में जब उन्होंने टाउन हाईस्कूल से स्नातक पास की, तो उन
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Nov 4, 20252 min read


अभ्यास का महत्त्व
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव प्राचीन समय में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर ही पढ़ा करते थे। बच्चे को शिक्षा ग्रहण करने के लिए गुरुकुल में भेजा जाता था। बच्चे गुरुकुल में गुरु के सानिध्य में आश्रम की देखभाल किया करते थे और अध्ययन भी किया करते थे। एक उम्र दराज विद्यार्थी को भी सभी की तरह गुरुकुल भेज दिया गया। वहां आश्रम में अपने साथियों के साथ घुलने मिलने लगा। लेकिन वह पढ़ने में बहुत ही कमजोर था। गुरुजी की कोई भी बात उसके बहुत कम समझ में आती थी। इस कारण सभी के बीच वह उपहास का कारण
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Nov 3, 20252 min read


एक राजा की कहानी
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव ये कहानी है एक राजा की जो कि एक लंबी यात्रा के लिए निकल ने वाला था। तो सारे प्रजा के लोग राजा को नाव तक छोड़ने के लिए आते है। उन लोगों में से एक आदमी राजा के पास आकर कहता है कि महाराज जब आप जंगल से होते हुए जाएंगे तो आपको वहाँ एक छोटे कद का आदमी मिलेगा और वह आपको लड़ने के लिए चुनौती देगा। उस आदमी को आप जान से मारे बिना आगे मत बढ़ना। अब राजा उस आदमी की बात मानकर यात्रा पर निकल पड़ता है। जब दो दिनों के बाद राजा जब जंगल पहुंचता है तब राजा को एक छोटी कद वाल
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Nov 3, 20252 min read


सफलता का रहस्य
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक बार एक व्यक्ति ने सुकरात से पूछा कि “सफलता का रहस्य क्या है?” सुकरात ने उस इंसान को कहा कि वह कल सुबह नदी के...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 7, 20251 min read


बादशाह का कुत्ता
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव ये कहानी है एक बादशाह की जिसे अपने कुत्ते से बड़ा प्यार था और वो हमेशा शाही अंदाज में रहता था। बादशाह के राज्य...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 7, 20253 min read


अपनी असीम शक्तियों को पहचानिए
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव मनुष्य वह अद्भुत रचना है, जिसमें ईश्वर ने असीम शक्तियों को छिपा रखा है। लेकिन बहुत से लोग अपने जीवन में कभी उन शक्तियों को पहचान ही नहीं पाते। वे बाहरी दुनिया की समस्याओं, चुनौतियों और असफलताओं में उलझकर अपने आत्मबल को भूल जाते हैं। जब जीवन में संघर्ष आता है, तब हम हार मान लेते हैं और अपनी कमज़ोरियों को दोष देने लगते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हर व्यक्ति के भीतर वह शक्ति है जो पर्वत को भी हिला सकती है। यदि हम अपने भीतर झाँकें, अपने मन की शक्ति को पहचा
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 3, 20254 min read


बड़े बदलाव के लिए आज छोटी शुरुआत करें
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव बदलाव की बात करते ही हमारे मन में एक बड़ी तस्वीर उभरती है – जैसे जीवन पूरी तरह बदल जाए, समाज में क्रांति आ जाए, या देश प्रगति की नई ऊँचाइयों को छू ले। परंतु हम यह भूल जाते हैं कि हर बड़ा बदलाव एक छोटी शुरुआत से ही जन्म लेता है। समुद्र की शुरुआत एक छोटे से जलकण से होती है और पर्वत की ऊँचाई एक-एक कण से बनती है। ठीक उसी तरह, यदि हम अपने जीवन, समाज या देश में कुछ बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं, तो उसकी पहली ईंट आज की छोटी कोशिश होनी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति क
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 2, 20254 min read


समय का सदुपयोग करें
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव "समय अमूल्य है" – यह वाक्य हम सभी ने अनगिनत बार सुना है। पर क्या हम वास्तव में इस अमूल्य धन का सही उपयोग करते...
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Oct 1, 20254 min read


बनिये का बेटा
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक गाँव में एक बनिया रहता था, उसकी बुद्धि की ख्याति दूर दूर तक फैली थी।एक बार वहाँ के राजा ने उसे चर्चा पर...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 1, 20252 min read


अपने काम से काम रखिये
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक पठान के पास एक बकरा और एक घोडा था। जिन्हें वो बहुत प्यार करता था। एक बार अचानक घोडा बीमार पड़ गया और बैठ...
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Sep 25, 20252 min read


रक्षाबंधन
ब्रिज उमराव भाई बहन का प्यार, यह राखी का त्योहार। बहना दूर से चलकर आई, कम न हो अपना प्यार।। प्रेम प्यार सुचिता का संगम, न हो मलाल मन...
ब्रिज उमराव
Sep 23, 20251 min read


चरित्रहीन
ममता पाण्डेय ये वक्त है आने का? मनोहर से रहा न गया। क्या करूं। काम ही ऐसा है? घर में घुसते हुए रागिनी ने जवाब दिया। रात ग्यारह बजने को...
ममता पाण्डेय
Sep 18, 20258 min read
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