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हर घर की कहानी....
दोस्तों ये किसी एक घर की कहानी नहीं बल्कि हर घर की यही कहानी है, हमारे देश के समाज में शादी होते ही लड़कियों की प्राथमिकताएं बदल दी जाती हैं। अपना परिवार अपना घर ही पराया हो जाता है और उसे वहाँ जाने के लिए उसे दूसरों की आज्ञा लेनी पड़ती है। अगर हो सके तो इस लेख को पढ़कर आप सब भी इस पर गौर जरूर फरमाइयेगा। और हो सके तो बहु को उसके माता-पिता के घर आने-जाने की आज़ादी जरूर दिजियेगा।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Apr 124 min read


धब्बा
धब्बा वो नहीं जो मेरे चेहरे पर है, धब्बा हैं तो ऐसी विकृत मानसकिता वाले लोग और धब्बो को इनकी सही जगह जेल ले जाने के लिए पुलिस अभी आती ही होगी। अब दहेज जेल में मांगे जुर्म में जेल के धब्बे साफ करना दोनो बाप- बेटा।" कह अपना पिता के गले लग गई थी सुरुचि, व न जाने कितनी सुरुचियों की प्रेरणा स्रोत बन चुकी थी।
अदिति महाजन
Apr 122 min read


संगत का प्रभाव
अपने बच्चों को उच्चशिक्षा के साथ साथ अच्छे संस्कार भी दीजिए ताकि वो जहां भी जाये सबका समान करे और अपने आचरण से खुद के साथ परिवार का नाम भी रोशन करे।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Apr 122 min read


अतिथि सत्कार
वह मेरा नित्य अपमान करता है तो भी मैंने उसे सौ साल तक सहा, किंतु तुम एक दिन भी न सह सके।" भगवान अंतर्धान हो गए और महात्मा जी की भी आँखें खुल गई।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Apr 81 min read


शूद्रा
गंगा को कई साल से यह चिन्ता लगी हुई थी कि कहीं गौरा की सगाई हो जाय, लेकिन कहीं बात पक्की न होती थी। अपने पति के मर जाने के बाद गंगा ने कोई दूसरा घर न किया था, न कोई दूसरा धन्धा ही करती थी। इससे लोगों को संदेह हो गया था कि आखिर इसका गुजर कैसे होता है! और लोग तो छाती फाड़-फाड़कर काम करते हैं, फिर भी पेट-भर अन्न मयस्सर नहीं होता। यह स्त्री कोई धंधा नहीं करती, फिर भी मां-बेटी आराम से रहती हैं, किसी के सामने हाथ नहीं फैलातीं। इसमें कुछ-न-कुछ रहस्य अवश्य है। धीरे-धीरे यह संदेह और भ
प्रेमचंद
Apr 722 min read


औरतें
एक बार खुद को फिर सुलगाना चाहती है
अपनी बासी होती जिंदगी में आग लाने के लिए
उस आग में जलकर दमकने के लिए
फीकी पड़ने लगी जिंदगी के रंग को
सुर्ख करके थोड़ा और जी लेने के लिए
फिर जवान होने लगती हैं औरतें।
अनु चक्रवर्ती
Apr 72 min read


बड़े भाई साहब
मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े, लेकिन केवल तीन दर्जे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैंने शुरू किया था, लेकिन तालीम जैसे महत्त्व के मामले में वह जल्दबाज़ी से काम लेना पसंद न करते थे। इस भवन की बुनियाद ख़ूब मज़बूत डालना चाहते थे, जिस पर आलीशान महल बन सके। एक साल का काम दो साल में करते थे। कभी-कभी तीन साल भी लग जाते थे। बुनियाद ही पुख़्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने।
प्रेमचंद
Apr 613 min read


एक रात का प्यार
रिया और अर्जुन एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे—बिना किसी वादे के, बिना किसी बंधन के—फिर भी एक अटूट एहसास के साथ।
और इस तरह “एक रात का प्यार” केवल एक कहानी नहीं रहा, बल्कि दो आत्माओं का वह अनमोल मिलन बन गया, जो इस बात का प्रमाण है कि सच्चा प्रेम समय, परिस्थिति और सीमाओं से परे होता है—और अक्सर वहीं खिलता है, जहाँ हम उसे सबसे कम उम्मीद करते हैं।
दीपक कुमार
Apr 64 min read


इंसानियत की पहचान
धीरे-धीरे पूरा हॉल खड़ा हो गया। सबने मिलकर उन्हें सैल्यूट किया, “जय हिंद सर!” लेकिन सबसे ज्यादा कांप रहे थे वे दो सिपाही जिन्होंने कल उन्हें अपमानित किया था।
वर्मा साहब ने उनकी ओर देखा, “माफी मांगने से ज्यादा जरूरी है सबक लेना। याद रखो जिस तरह तुमने मुझे धक्का दिया, उसी तरह तुम किसी और मजबूर इंसान को भी दे सकते हो। और तब वर्दी का सम्मान खो जाएगा।”
रामप्रसाद शर्मा
Apr 54 min read


चाट वाला
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव। एक चाट वाला था। जब भी उसके पास चाट खाने जाओ तो ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता था। कई बार उसे कहा कि भाई देर हो जाती है, जल्दी चाट लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नहीं होती। एक दिन अचानक उसके साथ मेरी कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई। तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैंने सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी भी देख ही लेते हैं। मैंने उससे एक सवाल पूछ लिया। मेरा सवाल उस चाट वाले से था कि, आदमी मेहनत से आगे
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Apr 51 min read


वो नारी
कितना कुछ करती हैं सिर्फ एक रिश्ते के लिए,
बेवकूफ़ होती हैं सच्ची औरतें,
उस एक रिश्ते में स्वयं बँध जाती हैं,
और अपेक्षा की चंद ख्वाहिशों में,
जीते जी स्वयं मर जाती हैं।
डॉ रीमा सिन्हा
Apr 31 min read


एक चुटकी ईमानदारी
ईमानदारी बड़ी घटनाओं से नहीं, छोटे फैसलों से जन्म लेती है। जब हम दूसरों की मजबूरी का लाभ उठाना छोड़ देते हैं — तभी समाज सच में मजबूत बनता है।
रमाकांत चतुर्वेदी
Apr 32 min read


दगाबाज़ तीतर
बाज़ार में कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया। मानो हर व्यक्ति अपने भीतर झाँकने लगा हो।
दोस्तों : दुश्मन से बचना आसान है, पर अपनों के भेष में छिपे विश्वासघातियों से नहीं। कभी-कभी सबसे बड़ा खतरा बाहर से नहीं, भीतर से आता है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Mar 302 min read


लोहे का तराजू
तब लोगों ने व्यापारी से पूरा मामला क्या है, बताने को कहा। व्यापारी ने लोगों को पूरा मामला बताया तो, व्यापारी की बात सुनकर बुजुर्गों ने साहूकार को तराजू वापस देने को कहा।
शिक्षा : जैसी करनी वैसी बरनी, जैसा बीज बोओगे, वैसी फसल काटोगे।
ललित कुमार
Mar 302 min read


रिश्ता रूह का
रात के तीसरे पहर में
तुम अपना सर रख कर विश्राम कर लेना यहाँ
क्योंकि अगले पहर
संसार का सूरज तुम्हें इसकी आज्ञा न दे शायद
और फिर
मेरी पीठ में नम पड़ते हुए
तमाम सूरज भी तो
अपने उगने की प्रतीक्षा में रहेंगे...
है ना....!!!
श्याम मुकर्जी
Mar 272 min read


संतों के प्रति आदर-भाव
दत्त-परिवार के लोग एक गाड़ी में घूमने बाहर निकले हैं। माँ की गोद में बैठे हुए नरेंद्रनाथ कई विषयों पर कितने ही प्रश्न करते चलते हैं, उनकी उत्सुकता की सीमा नहीं रहती। इसी बीच पिता ने उनसे पूछा, "विले, बड़े होने पर तुम क्या बनोगे, कहो तो?" नरेंद्र को सोचने की जरूरत नहीं थी, झट से उत्तर दिया, "सईस वा कोचवान।"
मुकेश ‘नादान’
Mar 272 min read


बस स्टैंड की वह बच्ची…
लोभ में इतना मत लो कि किसी और का हिस्सा भी छीन लो। क्योंकि असली संपत्ति धन नहीं, वो संवेदना है… जो भूख में भी बाँटना जानती है।
ललिता सिंह
Mar 242 min read


धिक्कार
दम के दम में पत्थरों के ढेर लग गये और मंदिर का द्वार चुन दिया गया। पासोनियस भीतर दांत पीसता रह गया।
वीर माता, तुम्हें धन्य है! ऐसी ही माता से देश का मुख उज्ज्वल होता है, जो देश-हित के सामने मातृ-स्नेह की धूल-बराबर परवाह नहीं करतीं! उनके पुत्र देश के लिए होते हैं, देश पुत्र के लिए नहीं होता।
प्रेमचंद
Mar 2410 min read


हीरे की पहचान
जो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में तुरंत गरम हो जाए, क्रोधित हो जाए, उलझ जाए— वह काँच के समान है।
लेकिन जो कठिन परिस्थितियों में भी शांत और स्थिर बना रहे— वही सच्चा हीरा होता है।”
उस दिन राजा के दरबार में केवल हीरे की ही नहीं, बल्कि मानव-स्वभाव की सच्ची पहचान भी हो गई।
रामकुमार वर्मा
Mar 84 min read


चोर का दान
गरीब भावुक हो गया, "सेठ जी, आप बहुत अच्छे हैं।"
सेठ ने कहा, "न मैं अच्छा हूँ, न तुम। अच्छा तो वह चोर था, जिसने रुक्मणि की शादी की चिंता कर ली। काश, दुनिया में ऐसे भले चोर और होते!"
यह कहते हुए सेठ ने गरीब को गले से लगा लिया
मंजुला अवस्थी
Mar 73 min read


व्यक्ति की पहचान
अब महात्मा जी बोले कि चीजें जैसी ऊपर से दिखती हैं, अंदर से वैसी नहीं होती। ये कोई मामूली अंगूठी नहीं है बल्कि ये एक हीरे की अंगूठी है जिसकी पहचान केवल सुनार ही कर सकता था।
इसलिए वह 5 माला देने को तैयार हो गया। ठीक वैसे ही मेरी वेशभूषा को देखकर तुम मुझसे प्रभावित नहीं हुए। लेकिन ज्ञान का प्रकाश लोगों को मेरी ओर खींच लाता है। व्यक्ति महात्मा जी की बातें सुनकर बड़ा शर्मिंदा हुआ।
शिक्षा:- कपड़ों से व्यक्ति की पहचान नहीं होती बल्कि आचरण और ज्ञान से व्यक्ति की पहचान होती है।
लक्ष्मी मिश्रा
Mar 62 min read


छोटी बहन
मैंने कहा, "पापा, आप भी तो मेरी भलाई के लिए ही चिंतित थे।" पापा ने एक बार फिर से मुझे सीने से लगा लिया और इस बार मम्मी और छोटी बहन भी आकर मुझसे लिपट गईं।
दोस्तो, मुझे मेरे पापा ने बचपन से लेकर आज तक एक बात ही सिखाई है, "अकेली लड़की मौका नहीं, जिम्मेदारी होती है हमारी।
रमेश मिश्रा
Mar 54 min read


ठाकुर का कुआँ
गंगी प्रतिदिन शाम पानी भर लिया करती थी। कुआँ दूर था, बार-बार जाना मुश्किल था। कल वह पानी लाई, तो उसमें बू बिलकुल न थी, आज पानी में बदबू कैसी ! लोटा नाक से लगाया, तो सचमुच बदबू थी। ज़रुर कोई जानवर कुएँ में गिरकर मर गया होगा, मगर दूसरा पानी आवे कहाँ से? ठाकुर के कुएँ पर कौन चढ़ने देगा? दूर से लोग डाँट बताएँगे। साहू का कुआँ गाँव के उस सिरे पर है, परंतु वहाँ भी कौन पानी भरने देगा? कोई तीसरा कुआँ गाँव में है नहीं।
प्रेमचंद
Mar 24 min read


हनुमान की खोज
बचपन में माँ की गोद में बैठकर उन्होंने रामायण की जो अपूर्व हृदयाकर्षक कहानी सुनी थी, वह दांपत्य जीवन के दुखमव अनुभव से व्यक्ति सईस की तिक वाणी से अचानक मलिन हो जाने पर भी कभी भी हृदय से मिट नहीं सकी, बल्कि पश्चिमी जीवन के आदर्श के संघर्ष में वह और अधिक स्पष्ट हो गई थी। खासकर रामायण के हनुमान का चरित्र उन्हें बाल्यकाल में बहुत ही आकृष्ट करता था। महावीर हनुमान का आदर्श उनके हृदय में सदैव देदीप्यमान रहता तथा रामायण-गान का समाचार पाते ही वे उसे सुनने दौड़ पड़ते थे।
मुकेश ‘नादान’
Mar 21 min read
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