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देवांगना
आज से ढाई हज़ार वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों को ब्रह्मचर्य और सदाचार की शिक्षा देकर बहुत जनों के हित के लिए, बहुत जनों के सुख के लिए, लोक पर दया करने के लिए, देव-मनुष्यों के प्रयोजन-हित सुख के लिए संसार में विचरण करने का आदेश दिया। वह 44 वर्षों तक, बरसात के तीन मासों को छोड़कर विचरण करते और लोगों को धर्मोपदेश देते रहे। उनका यह विचरण प्रायः सारे उत्तर प्रदेश और सारे बिहार तक ही सीमित था। इससे बाहर वे नहीं गये। परन्तु उनके जीवनकाल में ही उनके शिष्य भारत के अनेक भागों म
आचार्य चतुरसेन
Dec 29, 20253 min read


इन्द्रजाल
विन्ध्याचल के गहन कानन के बीच कान्तार-गामिनी युवती के बढ़ते हुए पद इस मर्मस्पर्शी सम्बोधन-स्वर को सुनते ही सहसा स्तम्भित हो गए। उसने चकित होकर चतुर्दिश पर्यालोचन किया तो पादुका-विहीन पद-चिह्नों से अकित मालुधान तुल्य क्षीण कान्तार की अपेक्षा उसे और कुछ दृष्टिगत न हुआ ।
रघुनाथ सिंह
Dec 29, 20252 min read


विचार स्नान
मैं सुंदर हो गया हूँ।
त्याग कर मनमैल।
मैं निर्मल हो गया हूँ।
मैं फिर सुंदर हो गया हूँ।।
कितना सुघड़ है ये पात्र खाली
कितना मधुर संगीत इसका।
डॉ. जहान सिंह ‘जहान’
Dec 28, 20251 min read


बदलाव
बूढ़े दादा जी को उदास बैठे देख बच्चों ने पूछा, “क्या हुआ दादा जी, आज आप इतने उदास बैठे क्या सोच रहे हैं?”
“कुछ नहीं, बस यूँही अपनी ज़िन्दगी के बारे में सोच रहा था।”, दादा जी बोले।
“जरा हमें भी अपनी लाइफ के बारे में बताइये न।”, बच्चों ने ज़िद्द्द की।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Dec 28, 20252 min read


रिश्तों की असली कीमत
पत्नी रचना ने जज के सामने ठंडे स्वर में कहा, “मुझे तलाक मंजूर है, लेकिन इसके बदले मुझे एक लाख रुपए चाहिए।”
पूरा कोर्टरूम सन्न रह गया। सबकी नजरें उस व्हीलचेयर पर बैठे विशाल की ओर मुड़ गईं। उसकी आँखों में कोई शिकवा नहीं था, बस एक गहरी चुप्पी थी।
दीपक दिवाकर
Dec 28, 20255 min read


गलती का एहसास
एक बार एक बहुत बड़ा व्यापारी एक छोटे से गांव में जाता है। उसका उद्देश्य होता है कि उस गांव में एक बड़ी सी फैक्ट्री लगानी है। वह एक ऐसी जगह पर पहुंच जाता है, जहां पर उसके सामने एक नदी होती है और उस नदी के सामने वह गांव होता है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Dec 27, 20253 min read


एक कहानी बड़ी सुहानी
ऑफिस से निकल कर शर्मा जी ने स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि उन्हें याद आया.. पत्नी ने कहा था 1 किलो जामुन लेते आना।
तभी उन्हें सड़क किनारे बड़े और ताज़ा जामुन बेचते हुए एक बीमार सी दिखने वाली बुढ़िया दिख गयी। वैसे तो वह फल हमेशा राम आसरे फ्रूट भण्डार से ही लेते थे, पर आज उन्हें लगा कि क्यों न बुढ़िया से ही खरीद लूँ?
संतोष श्रीवास्तव
Dec 27, 20253 min read


इंतज़ार की बरसात
छोटे से शहर के कॉलेज में जब अदिति ने कदम रखा, तो उसकी आँखों में बड़े-बड़े सपने थे। उसकी सादगी और मासूमियत ने कॉलेज में आते ही सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं दूसरी ओर, राघव कॉलेज का सबसे लोकप्रिय लड़का था - स्मार्ट, हैंडसम, और दिल का बहुत अच्छा। लेकिन राघव को प्यार पर विश्वास नहीं था। उसके लिए बस दोस्ती और मस्ती ही थी।
लक्ष्मी सारस्वत
Dec 26, 20252 min read


सच्चा सुख
राजकुमार विजय और सविता की शादी को पचास साल पूरे हो चुके थे। दोनों की उम्र अब पचहत्तर से ऊपर थी, और इन सालों में उन्होंने हंसी-खुशी और प्यार भरी जिंदगी साथ बिताई थी। समय के साथ, उनके बीच का रिश्ता गहराता गया था, मानो दोनों सच में "दो जिस्म, एक जान" बन गए हों। सविता ने विजय के साथ हर सुख-दुख बांटा था। उनके बीच में शायद ही कोई राज हो, लेकिन एक राज ऐसा था, जो सविता ने कभी विजय को नहीं बताया था। उनकी अलमारी के सबसे ऊपरी हिस्से में एक पुराना जूतों का बॉक्स रखा था। सविता ने विजय क
राजकुमार
Dec 26, 20252 min read


चमत्कारी गुलाब
कभी कभी कुछ बाते इंसान की समझ से बहुत दूर होती है। ऐसी ही बिलकुल समझ से बाहर थी रानी चित्रा। रानी चित्रा किसी चमत्कार से कम नहीं थी। कारण था रानी की सुंदरता। कहते थे रानी ने उम्र को बंदी बना लिया है।
सपना चौधरी
Dec 25, 20254 min read


निस्वार्थ प्रेम
रवि की बहन की शादी को सात साल हो चुके थे। उसने कभी बहन के ससुराल जाने की जरूरत महसूस नहीं की थी, हालांकि उसके माता-पिता त्योहारों पर कभी-कभी वहां जाया करते थे।
हेमा सिंह
Dec 25, 20252 min read


एक भिखारी
मालती त्रिपाठी पटना जंक्शन के बाहर फुटपाथ पर एक 25 साल की महिला बैठी थी। उसका चेहरा थका हुआ, आंखों के नीचे काले घेरे, होठ सूखे और कपड़े मैले-कुचैले थे। खूबसूरत तो थी, लेकिन हालात ने उसकी खूबसूरती को छुपा दिया था। वह राहगीरों से भीख मांगती, कभी पानी के लिए गुहार लगाती। लोग अक्सर उसे अनदेखा कर चले जाते, कोई सिक्का फेंक देता और कोई तिरस्कार से देखता। इसी भीड़ में एक दिन एक चमचमाती गाड़ी आकर रुकी। उसमें से एक 30 साल का युवक उतरा - साधारण कपड़े, चेहरे पर गंभीरता और आंखों में अपन
मालती त्रिपाठी
Dec 24, 20253 min read


हादसा
संगीता अग्रवाल हैदराबाद की भीड़भाड़ भरी गलियों में एक मासूम बच्चा आर्यन फुटपाथ पर बैठा था। उसकी उम्र मुश्किल से 8 साल थी, लेकिन उसके चेहरे पर बचपन की मासूमियत से ज्यादा भूख और बेबसी की लकीरें साफ नजर आती थीं। फटे कपड़े, नंगे पैर और खाली आंखों में हजारों सपने। आर्यन कभी अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से किराए के कमरे में रहता था। उसके पिता सत्यपाल मजदूरी करते थे और मां सुनीता सिलाई करती थीं। गरीब जरूर थे, लेकिन बेटे के लिए बड़े-बड़े सपने थे। सत्यपाल हमेशा कहते थे - ”आर्यन पढ़
संगीता अग्रवाल
Dec 24, 20253 min read


भाग्य का खेल
बहुत समय पहले की बात है, एक धनी सेठ जी थे। उनके पास बेशुमार संपत्ति थी, मान-सम्मान और शानो-शौकत की कोई कमी नहीं थी। सेठ जी की एक सुंदर और संस्कारी बेटी थी। उन्होंने अपनी बेटी का विवाह एक प्रतिष्ठित परिवार में किया, जहाँ सभी सुविधाएँ उपलब्ध थीं। किंतु बेटी का दुर्भाग्य देखिए, उसका पति निकला एक जुआरी और शराबी। धीरे-धीरे उनकी सारी संपत्ति जुए और शराब में लुटती चली गई। अब बेटी के पास ना तो पैसा था और ना ही सुख-शांति।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Dec 18, 20253 min read


अधूरा वादा
आज सुबह से जगदिश प्रसाद बहुत खुश था, अपनी बरसों पुरानी साईकिल को ग्रीस, आयल लगाकर और सरसों का तेल लगाकर एकदम चकाचक करने में मशगूल था, उसे यूँ तल्लीन देख पत्नी ने उसे टोका, "इस बरसों से पड़ी खटारा को क्यों इतना चमका रहे हो,और भी बहुत काम पड़े हैं, उनमें हाथ बंटा दो।"
संजय नायक
Dec 17, 20253 min read


कुम्हार का परिवार
एक गांव में एक कुम्हार रहता था, वो मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाता, और उसे शहर जाकर बेचा करता था। जैसे तैसे उसका गुजारा चल रहा था, एक दिन उसकी बीवी बोली कि अब यह मिट्टी के खिलौने और बर्तन बनाना बंद करो और शहर जाकर कोई नौकरी कर लो, क्योंकि इसे बनाने से हमारा गुजारा नही होता, काम करोगे तो महीने के अंत में कुछ धन आएगा। कुम्हार को भी अब ऐसा ही लगने लगा था, पर उसको मिट्टी के खिलौने बनाने का बहुत शौक था, लेकिन हालात से मजबूर था, और वो शहर जाकर नौकरी करने लगा,
देवयानी वर्मा
Dec 14, 20252 min read


घंटीधारी ऊंट
एक बार की बात हैं कि एक गांव में एक जुलाहा रहता था। वह बहुत गरीब था। उसकी शादी बचपन में ही हो गई ती। बीवी आने के बाद घर का खर्चा बढना था। यही चिन्ता उसे खाए जाती। फिर गांव में अकाल भी पडा। लोग कंगाल हो गए। जुलाहे की आय एकदम खत्म हो गई। उसके पास शहर जाने के सिवा और कोई चारा न रहा।
रमाशंकर त्रिपाठी
Dec 14, 20253 min read


कृष्णा बाई
एक गांव में कृष्णा बाई नाम की बुढ़िया रहती थी। वह भगवान श्रीकृष्ण की परमभक्त थी। वह एक झोपड़ी में रहती थी। कृष्णा बाई का वास्तविक नाम सुखिया था पर कृष्ण भक्ति के कारण इनका नाम गांव वालों ने कृष्णा बाई रख दिया।
घर-घर में झाड़ू पोछा बर्तन और खाना बनाना ही इनका काम था। कृष्णा बाई रोज फूलों का माला बनाकर दोनों समय श्री कृष्ण जी को पहनाती थी और घण्टों कान्हा से बात करती थी। गांव के लोग यहीं सोचते थे कि बुढ़िया पागल है।
अशोक गुप्ता
Dec 12, 20252 min read


मेरी बुद्धि
पुराने समय में एक राजा का फलों का बहुत बड़ा बाग था। बाग में अलग-अलग तरह के फल लगे थे। बाग का माली रोज राजा के लिए ताजे फल टोकरी में लेकर जाता था।
एक दिन बाग में नारियल, अमरूद और अंगूर पक गए। सेवक सोचने लगा कि आज कौन सा फल राजा के लिए लेकर जाना चाहिए। बहुत सोचने के बाद उसने अंगूर तोड़े और टोकरी में भर लिए। टोकरी लेकर वह राजा के पास पहुंच गया।
अशोक कुमार गर्ग
Dec 12, 20252 min read


मां या पत्नी
शादी की उम्र हो रही थी और मेरे लिए लड़कियां देखी जा रही थीं। मैं मन ही मन काफी खुश था कि चलो कोई तो ऐसा होगा जिसे मैं अपना हमसफर बोलूंगा, जिसके साथ जब मन करे प्यार करूंगा। मेरी अच्छी खासी नौकरी थी, घर में बूढ़ी मां और पापा थे, और इतनी कमाई थी कि अपने पत्नी का खर्चा उठा सकूं। ये सारी बातें सोच-सोचकर खुश होता था। मां की उम्र भी हो गई थी, तो एक प्वाइंट ये भी लोगों को बताता कि मुझे शादी की कोई जल्दी नहीं, ये तो मां हैं जिनकी उम्र निकल रही है, उनके लिए शादी करनी है।
केशव कालरा
Dec 11, 20256 min read
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