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बड़े बदलाव के लिए आज छोटी शुरुआत करें
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव बदलाव की बात करते ही हमारे मन में एक बड़ी तस्वीर उभरती है – जैसे जीवन पूरी तरह बदल जाए, समाज में क्रांति आ जाए, या देश प्रगति की नई ऊँचाइयों को छू ले। परंतु हम यह भूल जाते हैं कि हर बड़ा बदलाव एक छोटी शुरुआत से ही जन्म लेता है। समुद्र की शुरुआत एक छोटे से जलकण से होती है और पर्वत की ऊँचाई एक-एक कण से बनती है। ठीक उसी तरह, यदि हम अपने जीवन, समाज या देश में कुछ बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं, तो उसकी पहली ईंट आज की छोटी कोशिश होनी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति क
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 2, 20254 min read


समय का सदुपयोग करें
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव "समय अमूल्य है" – यह वाक्य हम सभी ने अनगिनत बार सुना है। पर क्या हम वास्तव में इस अमूल्य धन का सही उपयोग करते...
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Oct 1, 20254 min read


बनिये का बेटा
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक गाँव में एक बनिया रहता था, उसकी बुद्धि की ख्याति दूर दूर तक फैली थी।एक बार वहाँ के राजा ने उसे चर्चा पर...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 1, 20252 min read


अपने काम से काम रखिये
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक पठान के पास एक बकरा और एक घोडा था। जिन्हें वो बहुत प्यार करता था। एक बार अचानक घोडा बीमार पड़ गया और बैठ...
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Sep 25, 20252 min read


किसान की चतुराई
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव रहमत नगर में माधो नाम का एक किसान रहता था। उसके पास कई सारे खेत थे। लेकिन, उसका खेत पहाड़ी क्षेत्र में होने के...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Sep 18, 20252 min read


तसला और कटोरा
डॉ. कृष्ण कांत श्रीवास्तव यह कहानी उस वक्त की है, जब किसी आंदोलन के कारण महात्मा गांधी बड़ौदा जेल में बंद थे। इस वक्त तक गांधी जी का नाम...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Sep 17, 20252 min read


रोज कुछ नया जीवन में उतारें
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव जीवन एक निरंतर बहती नदी है, जो कभी नहीं रुकती। हर दिन हमारे जीवन में एक नया अवसर लेकर आता है – कुछ नया सीखने,...
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Aug 16, 20254 min read


सकारात्मक संगति में रहें
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव “संगति का असर गहरा होता है, या तो यह आपको ऊँचाइयों पर पहुँचा सकती है या फिर गर्त में गिरा सकती है।” हमारे जीवन...
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Aug 16, 20254 min read


सर्वस्व दान
बाजार वालों में श्रद्धा थी। साधु विद्वान थे। उन्होंने घर-घर जाकर चंदा एकत्र किया। मन्दिर बन गया। भगवान् की मूर्ति की बड़े भारी उत्सव के साथ पूजा हुई। भण्डारा हुआ। सबने आनन्द से भगवान् का प्रसाद लिया।
रीता देवी
Jul 27, 20251 min read


गाली पास ही रह गयी
‘पश्चात्ताप करने तथा फिर ऐसा न करने की प्रतिज्ञा करने से अपराध दूर हो जायगा। और ‘राम-राम’ कहने से मुख शुद्ध हो जायगा।’
रमेश द्विवेदी
Jul 27, 20251 min read


असफलता से न डरें
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव "असफलता" – एक ऐसा शब्द जिसे सुनते ही हमारे मन में नकारात्मक भावनाएँ उमड़ने लगती हैं। डर, निराशा, संदेह, हताशा –...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jul 17, 20254 min read


स्वच्छता
रंजन कुमार एक किसान ने एक बिल्ली पाल रखी थी। सफेद कोमल बालों वाली बिल्ली किसान की खाटपर ही रात को उसके पैर के पास सो जाती थी। किसान जब...
रंजन कुमार
Jul 17, 20252 min read


लहरें गिनना
रमापति शुक्ला एक दिन अकबर बादशाह के दरबार में एक व्यक्ति नौकरी मांगने के लिए अर्जी लेकर आया। उससे कुछ देर बातचीत करने के बाद बादशाह ने...
रमापति शुक्ला
Jul 2, 20252 min read


सोच बदलो, इंडिया बदलो
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव भारत एक युवा देश है। यहां की 65% जनसंख्या 35 वर्ष से कम उम्र की है। इतनी बड़ी युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र के लिए...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jun 26, 20254 min read


बड़ों की बात मानो
सरिता देवी एक बड़ा भारी जंगल था, पहाड़ था और उसमें पानी के शीतल निर्मल झरने थे। जंगल में बहुत-से पशु रहते थे। पर्वत की गुफा में एक शेर, एक...
सरिता देवी
Jun 26, 20252 min read


मुर्गे की सीख
रवि कुमार एक बड़ा व्यापारी था, गांव में उसके पास बहुत से मकान, पालतू पशु और कारखाने थे। एक दिन वह अपने परिवार सहित कारखानों, मकानों और...
रवि कुमार
Jun 21, 20255 min read


मित्रता की परख
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव रमानाथ और दीनानाथ में गहरी दोस्ती थी। दोनों ही एक-दूसरे पर जान छिड़कने का दम भरा करते थे। एक दिन दोनों घने जंगल...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jun 21, 20251 min read


नालायक
रमाशंकर कुशवाहा दीनानाथ जी कपड़े के व्यापारी थे। इनके तीन लड़के विशाल, रवि और सूरज थे। दीनानाथ जी चाहते थे कि इनके तीनों बच्चे अपने पैरों...
रमाशंकर कुशवाहा
Jun 4, 20253 min read


सोच बदलो
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक भिखारी था। रेल सफ़र में भीख़ माँगने के दौरान एक सूट बूट पहने सेठ जी उसे दिखे। उसने सोचा कि यह व्यक्ति बहुत...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
May 25, 20254 min read


मैडम या माँ
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक प्राथमिक स्कूल में अंजलि नाम की एक शिक्षिका थीं। वह कक्षा 5 की क्लास टीचर थी, उसकी एक आदत थी कि वह कक्षा में...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
May 25, 20256 min read
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