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रसीद का आखिरी नाम
रेखा जौहरी दिल्ली की गलियों में सुबह की हल्की रोशनी फैली थी। सड़क किनारे रसीद का छोले कुलचे वाला ठेला था, जिस पर टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में लिखा था – “रसीद का छोले कुलचे”। रसीद के पास अपनी मां का दिया ताबीज, बाप की पुरानी साइकिल और ठेले का जंग लगा चम्मच ही उसकी पूरी दुनिया थी। रसीद कम बोलता था, लेकिन उसकी आँखों में अनगिनत कहानियाँ छिपी थीं। गली के बच्चे उसे ‘रसीद भाई’ कहते, कभी वो उन्हें मुफ्त में कुलचे देता, कभी कहानी सुनाता। हर रोज दोपहर को एक बूढ़ा आदमी वहाँ से गुजरता, साफ
रेखा जौहरी
Dec 5, 20253 min read


मेरा फ़र्ज
अरुण कुमार गुप्ता पिताजी के जाने के बाद आज पहली दफ़ा हम दोनों भाईयों में जम कर बहसबाजी हुई। फ़ोन पर ही उसे मैंने उसे खूब खरी-खरी सुना दी। पुश्तैनी घर छोड़कर मैं कुछ किलोमीटर दूर इस सोसायटी में रहने आ गया था। उन तंग गलियों में रहना मुझे और मेरे बच्चों को कतई नहीं भाता था। हम दोनों मियां-बीबी की अच्छी खासी तनख्वाह के बूते हमने ये बढ़िया से फ्लैट ले लिया। सीधे-साधे से हमारे पिताजी ने कोई वसीयत तो की नहीं पर उस पुश्तैनी घर पर मेरा भी तो बराबर का हक बनता है। छोटा भाई मना नहीं करता,
अरुण कुमार गुप्ता
Dec 4, 20252 min read


बंद मुट्ठी
रजनीकांत द्विवेदी एक बार की बात है, एक राजा ने घोषणा की कि वह कुछ दिनों के लिए पूजा करने के लिए अपने राज्य के मंदिर में जाएगा। जैसे ही मंदिर के पुजारी को यह खबर मिली, उसने राजा की यात्रा के लिए सब कुछ सही करने के लिए मंदिर को सजाने और रंगने का काम शुरू कर दिया। इन खर्चों को पूरा करने के लिए पुजारी ने 6,000 रुपये का कर्ज लिया। जिस दिन राजा मंदिर पहुंचे, उन्होंने दर्शन, पूजा और अर्चना की। समारोह के बाद, उन्होंने आरती की थाली में दान (दक्षिणा) के रूप में चार रुपये रखे और फिर
रजनीकांत द्विवेदी
Dec 4, 20252 min read


एकता की ताकत
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव जंगली भैंसों का एक झुण्ड जंगल में घूम रहा था। तभी एक बछड़े ने पुछा... पिता जी, क्या इस जंगल में ऐसी कोई चीज है जिससे डरने की ज़रुरत है? बस शेरों से सावधान रहना.. भैंसा बोला। हाँ, मैंने भी सुना है कि शेर बड़े खतरनाक होते हैं...। अगर कभी मुझे शेर दिखा तो मैं जितना हो सके उतनी तेजी से दौड़ता हुआ भाग जाऊँगा... बछड़ा बोला। नहीं.. इससे बुरा तो तुम कुछ कर ही नहीं सकते.. भैंसा बोला। बछड़े को ये बात कुछ अजीब लगी..वह बोला। क्यों? वे खतरनाक होते हैं... मुझे मार स
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Nov 26, 20252 min read


मीठे बोल
रीता सिंह नव विवाहित जोड़ा किराए का मकान देखने के लिए शर्मा जी के घर पहुंचा। दोनों मियां बीवी खुश हो गए चलो कुछ रौनक होगी कितना सुंदर जोड़ा है हम इन्हें घर जरूर देंगे। "आंटी अंकल हमें दो रुम किचन का मकान चाहिए.. क्या हम मकान देख सकते हैं? घुटनों के दर्द से बेहाल सीमा जी उठते हुए बोली "हां हां बेटा क्यों नहीं देख लो। बाजू में ही छोटा पोर्शन किराए के लिए बनवाया था आर्थिक सहायता भी होगी तनिक रौनक भी लगी रहेगी। मकान बहुत पसंद आया जोड़े को "अंकल हम लोग कल इतवार को ही शिफ्ट कर
रीता सिंह
Nov 26, 20252 min read


माँ की पीड़ा
राजीव कुमार एक ठंडी शाम थी। हवा में हल्की ठंडक थी, और आसमान में घने बादल छाए हुए थे। छत पर अकेली बैठी सुलोचना बुत बनी हुई थी, उसकी आँखें कहीं दूर टिकी थीं। बारिश कब से शुरू हो चुकी थी, पर उसे इसका कोई अहसास नहीं था। उसका बदन थर-थर काँप रहा था, मगर मानो वो खुद को महसूस ही नहीं कर रही थी। ठंडी हवाएँ उसे कंपा रही थीं, लेकिन वह अपने विचारों में गुम थी। अचानक उसे अपने नाम की पुकार सुनाई दी। "कहाँ हो सुलोचना? पूरा घर छान मारा, और तुम यहाँ छत पर भीग रही हो! जल्दी नीचे चलो, कपड़े ब
राजीव कुमार
Nov 25, 20252 min read


समय और धैर्य
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक साधु था, वह रोज घाट के किनारे बैठ कर चिल्लाया करता था, ”जो चाहोगे सो पाओगे", "जो चाहोगे सो पाओगे" बहुत से लोग वहाँ से गुजरते थे पर कोई भी उसकी बात पर ध्यान नही देता था और सब उसे एक पागल आदमी समझते थे। एक दिन एक युवक वहाँ से गुजरा और उसने उस साधु की आवाज सुनी, “जो चाहोगे सो पाओगे”, जो चाहोगे सो पाओगे”, और आवाज सुनते ही उसके पास चला गया। उसने साधु से पूछा ”महाराज आप बोल रहे थे कि ‘जो चाहोगे सो पाओगे’ तो क्या आप मुझको वो दे सकते हो जो मैं जो चाहता
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Nov 25, 20252 min read


गलत मार्ग का अंजाम
रत्न सावरकर किसी ग्राम में किसान दम्पती रहा करते थे। किसान तो वृद्ध था पर उसकी पत्नी युवती थी। अपने पति से संतुष्ट न रहने के कारण किसान की पत्नी सदा पर-पुरुष की टोह में रहती थी, इस कारण एक क्षण भी घर में नहीं ठहरती थी। एक दिन किसी ठग ने उसको घर से निकलते हुए देख लिया। उसने उसका पीछा किया और जब देखा कि वह एकान्त में पहुँच गई तो उसके सम्मुख जाकर उसने कहा, “देखो, मेरी पत्नी का देहान्त हो चुका है। मैं तुम पर अनुरक्त हूं। मेरे साथ चलो।” वह बोली, “यदि ऐसी ही बात है तो मेरे पति क
रत्न सावरकर
Nov 24, 20252 min read


पश्चाताप
रमाशंकर मिश्रा सुमन की शादी को अभी कुछ ही साल हुए थे। वो अपने पति राजेश और सास के साथ रहती थी। शुरू में सब कुछ ठीक था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, सुमन के और उसकी सास के बीच छोटे-छोटे मामलों को लेकर मतभेद होने लगे। एक दिन सुमन को पता चला कि उसका सोने का हार नहीं मिल रहा है। उसने सारा घर छान मारा, हर जगह ढूंढ़ा, लेकिन हार का कहीं नामोनिशान नहीं था। सुमन को अपने मन में शक हुआ कि कहीं उसकी सास ने ही तो हार नहीं चुराया। उसे याद आया कि उसकी सास ने एक बार उसके गहनों को बड़े ध्
रमाकांत मिश्रा
Nov 24, 20253 min read


मां का घर
सविता देवी एक दिन मैंने अपने पति के साथ झगड़े वाली सारी बातें अपने भाई को बता दी तो भाई ने कहा कि एक काम करो तुम कुछ दिनों के लिए हमारे घर आ जाओ...!! जब तुम दोंनो कुछ दिन एक दूसरे से अलग रहोगे तो तुम दोंनो को एक दूसरे की कमी का एहसास होगा...!! फिर मैं कुछ दिनों के लिए पति का घर छोड़कर भाई के घर आ गई... हालांकि मेरा भाई बहुत अच्छा है मुझे बहुत प्यार भी करता है पर कहते हैं न कि भाई चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो परन्तू...!! अगर कोई काम भाभी की मर्जी के हो तो घर का माहौल, खराब
सविता देवी
Nov 21, 20252 min read


इज्जत और इंसानियत
गोपाल चंद्र सर्दियों की सुबह थी। मुंबई एयरपोर्ट पर भीड़ अपने चरम पर थी। बिजनेस ट्रैवलर्स लैपटॉप लेकर भाग रहे थे, परिवार छुट्टियों पर जाने को तैयार थे और हर तरफ चकाचौंध थी। इसी भीड़ में एक बुजुर्ग महिला, श्रीमती विमला देवी, धीरे-धीरे चलते हुए एयरलाइंस के काउंटर तक पहुंची। उनका पहनावा सादा था - एक सूती साड़ी, ऊपर पुराना शॉल और पैरों में साधारण चप्पलें। हाथ में एक प्लास्टिक कवर में रखी प्रिंटेड टिकट थी। चेहरे पर शांति थी, लेकिन आंखों में थकान भी थी। उन्हें बस सीट कंफर्म होने का
गोपाल चंद्र
Nov 20, 20256 min read


सौदा
अंजलि शर्मा इस बड़े शहर में एक छोटा सा कॉस्मेटिक शॉप है मेरा। पति ने खोला था मेरे नाम पर। झुमकी श्रृंगार स्टोर। आज एक नया जोड़ा आया है मेरे दुकान पर। स्टाफ ने बताया कि सुबह से दूसरी बार आये हैं। एक कंगन इन्हें पसंद है पर इनके हिसाब से दाम ज्यादा है। इन्हें देख इस दुकान की नींव, मेरा वजूद, और अपनी कहानी याद आ गई। ऐसे ही शादी के बाद पहली बार हम एक मेले में साथ गए थे। मुझे काँच की चूड़ियों का एक सेट पसंद आया था। तब आठ रुपये की थी और हम ले ना पाए थे। ये बार बार पाँच रुपये की बात कर
अंजलि शर्मा
Nov 19, 20252 min read


समय-प्रबंधन
डॉo कृष्ण कांत श्रीवास्तव इस संसार में मौसम आते हैं और जाते हैं, मनुष्य आते हैं और जाते हैं, समाज बनता है और बिगड़ता है, पर समय बिना रुके सदा चलता रहता है। समय को कोई पकड़ नहीं सकता। हम जितना उसके पीछे दौड़ते हैं वह उतना ही आगे भाग जाता है। यह बहुत बड़ी विडंबना है कि हम समय का महत्व जानते हुए भी उसे व्यर्थ के कार्यों में जाया करते रहते हैं। समय-प्रबंधन की असमर्थता ही इसका मूल कारण है। हम यह भूल जाते हैं कि जीवन-प्रबंधन के लिए, व्यक्तित्व निर्माण के लिए और कार्यक्षेत्र में सफ
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Nov 18, 20257 min read


समझदार व्यापारी
हीरालाल मशालो का एक व्यापारी था, जो शहर-शहर जाकर मशाले बेचा करता था। एक दिन उसकी तबीयब बहुत खराब हो गयी जिस कारण वह मशाले बेचने नहीं जा पाता है।
हरिशंकर परसाई
Nov 18, 20253 min read


चौथा मित्र
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक गाँव में चार मित्र रहते थे। उनमें से तीन पढ़े-लिखे व विद्वान थे परंतु चौथा इतना विद्वान नहीं था, पर हर बात की सामान्य जानकारी रखता था। वह काफी व्यावहारिक था और अपने अच्छे-बुरे की समझ रखता था। एक दिन तीनों मित्रों ने तय किया कि उन्हें अपने ज्ञान के बल पर धन कमाना चाहिए। वे अपनी किस्मत आजमाने के लिए दूसरे देश के लिए चल पड़े। वे चौथे दोस्त को साथ नहीं ले जाना चाहते थे क्योंकि वह अधिक पढ़ा-लिखा नहीं था लेकिन बचपन का दोस्त होने के नाते उसे भी साथ ले ल
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Nov 4, 20252 min read


महान् गणितज्ञ रामानुजन : धुन के पक्के
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव रामानुजन का जन्म एक गरीब परिवार में 22 दिसम्बर, 1887 को तमिलनाडु के इरोड़ कस्बे में हुआ था। उनके पिता एक साड़ी की दुकान पर क्लर्क का काम करते थे। रामानुजन के जीवन पर उनकी माँ का बहुत प्रभाव था। जब वे 11 वर्ष के थे, तो उन्होंने गणित की किताब की पूरी मास्टरी कर ली थी। गणित का ज्ञान तो जैसे उन्हें ईश्वर के यहाँ से ही मिला था। 14 वर्ष की उम्र में उन्हें मेरिट सर्टीफिकेट्स एवं कई अवार्ड मिले। वर्ष 1904 में जब उन्होंने टाउन हाईस्कूल से स्नातक पास की, तो उन
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Nov 4, 20252 min read


अभ्यास का महत्त्व
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव प्राचीन समय में विद्यार्थी गुरुकुल में रहकर ही पढ़ा करते थे। बच्चे को शिक्षा ग्रहण करने के लिए गुरुकुल में भेजा जाता था। बच्चे गुरुकुल में गुरु के सानिध्य में आश्रम की देखभाल किया करते थे और अध्ययन भी किया करते थे। एक उम्र दराज विद्यार्थी को भी सभी की तरह गुरुकुल भेज दिया गया। वहां आश्रम में अपने साथियों के साथ घुलने मिलने लगा। लेकिन वह पढ़ने में बहुत ही कमजोर था। गुरुजी की कोई भी बात उसके बहुत कम समझ में आती थी। इस कारण सभी के बीच वह उपहास का कारण
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Nov 3, 20252 min read


एक राजा की कहानी
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव ये कहानी है एक राजा की जो कि एक लंबी यात्रा के लिए निकल ने वाला था। तो सारे प्रजा के लोग राजा को नाव तक छोड़ने के लिए आते है। उन लोगों में से एक आदमी राजा के पास आकर कहता है कि महाराज जब आप जंगल से होते हुए जाएंगे तो आपको वहाँ एक छोटे कद का आदमी मिलेगा और वह आपको लड़ने के लिए चुनौती देगा। उस आदमी को आप जान से मारे बिना आगे मत बढ़ना। अब राजा उस आदमी की बात मानकर यात्रा पर निकल पड़ता है। जब दो दिनों के बाद राजा जब जंगल पहुंचता है तब राजा को एक छोटी कद वाल
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Nov 3, 20252 min read


सफलता का रहस्य
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक बार एक व्यक्ति ने सुकरात से पूछा कि “सफलता का रहस्य क्या है?” सुकरात ने उस इंसान को कहा कि वह कल सुबह नदी के...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 7, 20251 min read


बादशाह का कुत्ता
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव ये कहानी है एक बादशाह की जिसे अपने कुत्ते से बड़ा प्यार था और वो हमेशा शाही अंदाज में रहता था। बादशाह के राज्य...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 7, 20253 min read
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