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गलियों में इंसानियत
निर्मल ने महसूस किया कि जीवन का असली सुख वही है, जहां इंसान अपने दिल की सुनता है, सही निर्णय करता है और दूसरों के लिए ईमानदारी और स्नेह रखता है। धीरे-धीरे उनके घर में खुशियों की गूंज बढ़ती गई। राधिका ने अपने बच्चों और निर्मल के साथ हर पल का आनंद लिया। निर्मल ने उनके साथ जीवन बिताने के हर क्षण को संजोया।
राम कुमार वर्मा
Feb 274 min read


लड़की हूँ,
वो गुलशन जो, खाद-धूप को,
पाकर भी, गुलज़ार नहीं हूँ
मैं वो सपना, जो आँखों में,
आकर भी साकार नहीं हूँ
जो देखा, जो जाना,
जो महसूस किया, लफ़्ज़ों में ढाला
मैने अपनी, बात कही बस,
मैं कोई, फ़नकार नहीं हूँ
हुस्न, मौसिकी, रंग, नज़ारे,
सब कुछ ही संसार हैं उसका
आँचल सक्सैना
Feb 261 min read


बेचारे पतिदेव
मजदूर दिवस की असली बधाई उसी को मिलनी चाहिए, जो रोज़ बिना वेतन, बिना छुट्टी, बिना शिकायत घर को “घर” बनाए रखता है।
श्री प्रसाद चौरसिया
Feb 263 min read


बेशकीमती दौलत
यदि आपका जीवनसाथी आज आपके पास है, तो उसका सम्मान कीजिए, उसकी भावनाओं को समझिए, और इस अनमोल रिश्ते को सहेजकर रखिए। क्योंकि सच्चा प्रेम वही है, जो समय की हर आँधी में अडिग खड़ा रहे - और अंत में यही सिद्ध करे कि दुनिया की सबसे बेशकीमती दौलत, प्यार है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 253 min read


अवीर गुलाल की होली
अगले साल से हम सब सिर्फ अवीर गुलाल से ही होली खेलेंगे। दारा शेर प्रधान मंत्री टनटन शेर की ओर से चांदी का सिल्ड और पांच हजार रूपया नगद पा कर खुशी से फुला नही समाया। पुरस्कार पाने की खुशी में सभी जानवर दारा शेर को बधाई दे कर अपने घर जाने लगे।
बद्री प्रसाद वर्मा अनजान
Feb 253 min read


एहसास एक अनुभूति
पति पत्नी का प्रेम वहीं तक
जब तक एक दूजे का साथ निभाया।
एक ने भी गर दामन छोड़ दिया
तो यह रिश्ता भी हो जाता पराया।
बबिता चौधरी "राही"
Feb 251 min read


अनपढ़ व्यापारी
यह कहानी मज़ाक में कही गई लग सकती है, पर संदेश स्पष्ट है—परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, यदि मन में लगन और हाथों में मेहनत हो, तो घंटी बजाने वाला भी एक दिन सफलता की गूंज बन सकता है।
राम प्रकाश वर्मा
Feb 232 min read


सपनों के सौदागर
यदि सपनों के सौदागर होते
हम होते नील गगन में,
मन की बातें, मन की चाहें
पूरी हो जातीं इक पल में,
हम भी बड़े महल में होते
राजकुमारी होते।
यदि सपनों के सौदागर होते
सपनों में ही रहते,
कुटिया के बर्तन भी फिर तो
सोने की सब होते,
पेड़ों पर रसगुल्ले होते
तोड़ तोड़ कर खाते।
साची सेठ
Feb 231 min read


सफलता का रहस्य
जो लोग सफलता प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं उन्हें आज नहीं तो कल सफलता मिल ही जाती है। याद रखिये कि जीवन की नाकामयाबी ही कामयाबी की तरफ बढ़ता एक कदम होता है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 233 min read


अंजाने रिश्ते
डॉ मंजु सैनी एक अनजाना सा रिश्ता मन का मीत बना और फिर बिछुड़ गया एक नश्तर बन मेरे जीवन में साथ निभाने की जो बातें हुईं छोड़ गया यूँ ही क्षण भर में आज नश्तर से चुभते हैं नासूर बन छोड़ गए चिह्न जीवंत हूँ तो टीसता हैं वो दर्द नजर अंदाज करती हूँ फिर भी खामोश रह जाती हूं सोचकर शायद यही किस्मत में लिखा है बस गया था सांसों में मानो रह नही पाऊँगी उस बिन पर चल रही हैं जिंदगी यूं ही अकेले सफर में चलते चलते ही रह गया हैं मात्र यादो का कारवां शायद कभी होगा मेरी यादों को उसका सही मुकाम मुक
डॉ मंजु सैनी
Feb 221 min read


बेटी की योग्यता
अपनी संतान से प्रेम अवश्य करें, पर उसे इतना सक्षम भी बनाएं कि वह जहां जाए, वहां केवल अपने सपनों को ही नहीं, रिश्तों को भी निभा सके।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Feb 223 min read


कद्दू की तीर्थयात्रा
जब तक हमारे व्यवहार व सोच में परिवर्तन नहीं होता है हमारी तीर्थ यात्रा अधूरी ही मानी जाती है। संस्कारों में आधारभूत परिवर्तन ही तीर्थ यात्रा का वास्तविक प्रतिफल है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 222 min read


मैं शिव हो गया हूँ।
संन्यासी होने की साथ उन्हें बचपन से ही थी। एक दिन एक गेरुए वत्र को लपेटकर वे घूमने निकल रहे थे। यह देखकर माँ ने पूछा, "यह क्या रे?" वरिश्वर ने उल्लासपूर्वक ऊँचे स्वर में कहा, "मैं शिव हो गया हूँ।" उनमें ध्यान-प्रवणता भी थी। चड़ों के मुँह से उन्होंने सुना था कि ध्यान में निमग्न ऋषि-मुनियों की जटा बढ़कर धरती को छूने लगती है और धीरे-धीरे बरगद के पेड़ की जटा की तरह धरती में घुस जाती है।
मुकेश ‘नादान’
Feb 192 min read


असमय की एक कविता
आजकल एकदम खाली हूँ
इतना खाली कि मेरे हिस्से
कोई काम ही नहीं बचा,
कभी समय मुझ पर हँसता है
कभी मैं समय पर
और यह भी क्या इत्तेफाक़ है
मेरा समय सापेक्ष होना
मुझे निरपेक्षता का सिद्धान्त समझा रहा है
संदीप तोमर
Feb 192 min read


ईश्वर की कृपा
एक आश्रम में संतों की विशाल सभा लगी हुई थी। भजन, प्रवचन और शांति का वातावरण चारों ओर फैला था। किसी श्रद्धालु ने प्रेम से एक नया मिट्टी का घड़ा लाकर उसमें गंगाजल भर दिया और सभा के बीच रख दिया, ताकि जब भी किसी संत को प्यास लगे, वह गंगाजल ग्रहण कर सकें।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 123 min read


सबसे बड़ा धन
एक समृद्ध गाँव में एक सेठ रहता था। हवेली ऊँची, तिजोरियाँ भरी हुई, नौकर-चाकरों की कतार लगी रहती थी। धन की कोई कमी नहीं थी। लेकिन उस सेठ के जीवन में एक बड़ी कमी थी—परिश्रम की। वह इतना आलसी था कि पानी का गिलास भी खुद उठाकर नहीं पीता था। सुबह देर तक सोना, दिन भर बिस्तर पर पड़े रहना, रात को दावतें और ऐशो-आराम—बस यही दिनचर्या थी।
रामकिशोर वर्मा
Feb 122 min read


भगवान का स्वरुप
एक बार भगवान श्री कृष्ण सो रहे थे और निद्रावस्था में उनके मुख से राधा जी का नाम निकला। पटरानियों को लगा कि वह प्रभु की इतनी सेवा करती है परंतु प्रभु सबसे ज्यादा राधा जी का ही स्मरण रहता है।
के.सी. शर्मा
Feb 814 min read


रिश्तों की नसीहत
एक बार दो बुजुर्ग एक सफर में साथ जा रहे थे। पहला बुजुर्ग अपनी पोती की शादी के लिए चिंतित था। तो अपने पास बैठे हुए बुजुर्ग को कहता है:-
पहला :- मेरी एक पोती है, शादी के लायक है। BEd किया है, नौकरी करती है, कद - 5"2 इंच है। सुंदर है। कोई लडका नजर मे हो तो बताइएगा।
अनुज कुमार जायसवाल
Feb 82 min read


विवाह का प्रस्ताव
किसी समय नरेंद्रनाथ पिता की आज्ञा से अपने पिता के मित्र निमाईचंद बसु के ऑफिस में शिक्षार्थी (अपरेंटिस) के रूप में कार्य करते थे। प्रक्ताद्ध मेंसस के नियम के अनुसार उनका इक्कीसवाँ वर्ष पूरा होने पर, पिता की ही आज्ञा से इस लॉज में (तत्कालीन 234 ऐंकर एंड होप लॉज वर्तमान में, ग्रंड लॉज ऑफ इंडिया) भरती हुए। उन दिनों वकील, जज, सरकार के बड़े-बड़े अफसर आदि अनेक लोग फ्री मेंससों के दल में अपना नाम लिखवाते थे। इसी से विश्वनाथ सोचते थे कि वहाँ जाने से भावी सामाजिक जीवन में पुत्र को सुवि
मुकेश ‘नादान’
Feb 71 min read


नंदिता और मयंक: एक अनकही प्रेम कहानी
“नंदिता! प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरे कि नहीं? फॉर्म पास है या ले आऊँ?"
“ग्रेजुएशन के बाद से ही किसी बड़े व्यवसाई घराने में ब्याह हो जाए, बस इतना ही ख्वाब है मेरे माता पिता का। मैं किसी को पसंद न आई, तभी पढ़ाई पूरी हो पाई”, उदास मुस्कान आकर ठहर गई।
“ऐसा न कहिए, नंदिता! आप कॉलेज की शान हैं, एक खूबसूरत, व्यवहारिक, टॉपर लड़की का सपना सिर्फ किसी सेठ जी की बहू बनना कैसे हो सकता है?” नाटकीय अंदाज़ में उसने पूछा।
नीना सिन्हा
Jan 83 min read


दण्ड
संध्या का समय था। कचहरी उठ गयी थी। अहलकार चपरासी जेबें खनखनाते घर जा रहे थे। मेहतर कूड़े टटोल रहा था कि शायद कहीं पैसे मिल जायें। कचहरी के बरामदों में सांडों ने वकीलों की जगह ले ली थी। पेड़ों के नीचे मुहर्रिरों की जगह कुत्ते बैठे नजर आते थे। इसी समय एक बूढ़ा आदमी, फटे-पुराने कपड़े पहने, लाठी टेकता हुआ, जंट साहब के बंगले पर पहुंचा और सायबान में खड़ा हो गया। जंट साहब का नाम था मिस्टर जी0 सिनहा। अरदली ने दूर ही से ललकारा—कौन सायबान में खड़ा है? क्या चाहता है।
प्रेमचंद
Jan 816 min read


ईदगाह
रमज़ान के पूरे तीस रोज़ों के बाद ईद आई है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभात है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक़ है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कितना शीतल है, यानी संसार को ईद की बधाई दे रहा है। गाँव में कितनी हलचल है। ईदगाह जाने की तैयारियाँ हो रही हैं। किसी के कुरते में बटन नहीं है, पड़ोस के घर में सुई-तागा लेने दौड़ा जा रहा है। किसी के जूते कड़े हो गए हैं, उनमें तेल डालने के लिए तेली के घर पर भागा जाता है। जल्दी-जल्दी
प्रेमचंद
Jan 818 min read


पिता का आशीर्वाद
जब मृत्यु का समय न्निकट आया तो पिता ने अपने एकमात्र पुत्र धनपाल को बुलाकर कहा कि “बेटा मेरे पास धन-संपत्ति नहीं है कि मैं तुम्हें विरासत में दूं। पर मैंने जीवनभर सच्चाई और प्रामाणिकता से काम किया है। तो मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूं कि, तुम जीवन में बहुत सुखी रहोगे और धूल को भी हाथ लगाओगे तो वह सोना बन जायेगी।”
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Jan 74 min read
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